कर्ज़ में काम नहीं किया होता तो लोग बुद्धू समझते : सिमी

सुभाष है कि करीब 37 साल पहले आई फिल्म कर्ज़ का एक एक किरदार आज भी यादगार है और इसी कारण अब इस फिल्म में काम करने वाली सिमी ग्रेवाल को लगता है कि अगर उन्होंने कर्ज़ में काम नहीं किया होता तो सब उन्हें बुद्धू समझते।

फिल्म कर्ज़ की दोबारा स्क्रीनिंग के मौके पर रविवार को मुंबई में हुए एक समारोह में सिमी ने कहा “फिल्म से जुड़ी कई यादगार बातें है जो आज भी वो याद करती हैं। अगर मैं यह फिल्म नहीं करती तो सबसे बड़ी बुध्दू होती लेकिन मुझे ख़ुशी है कि मैंने यह फिल्म की।” सिमी ग्रेवाल ने यह भी कहा कि “जब इस फिल्म के निर्देशक सुभाष घई कर्ज़ बना रहे थे तो उन पर एक जुनून सा छाया हुआ था। साथ ही उनमें एक ऐसी ऊर्जा देखने को मिल रही थी मानों कि वो किसी मिशन पर है। मुझे लगता है कि सुभाष जी की ईमानदारी और उनका समर्पण देखकर हम सभी उनके पीछे हो लिए और उन्होंने जो कहा वो हमने किया।” सिमी ग्रेवाल ने कहा कि सुभाष घई के बारे में एक बात मुझे बतानी है कि वो कभी भी रुकें नहीं बल्कि एक के बाद एक सफलता की सीढ़ी चढ़ते गए और यही उनके बारे में सबसे खास बात है।

फिल्म कर्ज़ उस दौर में बॉक्स ऑफिस पर ख़ास नहीं चली थी और सुभाष घई ने भी मान लिया था कि उनकी ये फिल्म समय से बहुत आगे की फिल्म है। हालांकि बाद में इस फिल्म को हिंदी सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में गिना गया और कर्ज़ की कहानी से मिलती जुलती कई फिल्में आई।

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