क्या आपका बच्चा भी सह रहा है अकेलेपन का दर्द

आजकल की दौड़ती-भागती जिंदगी में अपने लाइफस्‍टाइल को ‘हाई-फाई’ बनाने के लिए हर माता-पिता जी-तोड़ कोशिश करता है. अच्‍छी एजुकेशन, ब्रांडेड कपड़े अब इतने महत्‍वपूर्ण हो चुके हैं कि लोग इनको पाने के लिए दिन रात काम करते हैं. आज न्यूक्लियर फैमिली होने के नाते वर्किंग पैरेंट्स अपने छोटे से बच्‍चे को क्रेच में या मेड के सहारे छोड़ने को मजबूर है. ऐसे में कई बार बच्‍चों के अंदर अकेलेपन की भावना घर करने लगती है. बच्‍चों को लगने लगता है कि उनके पैरेंट्स उन्‍हें समय नहीं देते, उन्‍हें प्‍यार नहीं करते. अगर आपका बच्‍चा भी इन दिनों इन चीजों से गुजर रहा है तो इन टिप्‍स को ट्राई जरूर करें.

अगर आपके बच्‍चे की उम्र 8 माह से 1 साल के बीच है तो उसे अजनबी लोगों के पास न छोंड़ें. यह तब होता है जब बच्‍चों के अंदर अकेलेपन की चिंता सबसे अधिक शुरू होने लगती है.

अगर आपके बड़े बच्‍चे को बेहद भूख लगी हो या वह बहुत थका हुआ हो तो अपने छोटे बच्‍चे को उसके साथ न छोड़ें.

आप वर्किंग हैं और आपकी न्यूक्लियर फैमिली है तो शुरुआत में थोड़े- थोड़े समय के लिए अपने बच्‍चे को क्रेच में छोड़ें. इसके
बाद धीरे-धीरे इस समय को बढ़ते रहें, इससे बच्‍चे को अकेलापन महसूस नहीं होगा.

हमेशा शांत रहें, और अपने ड्रॉप-ऑफ रूटीन में सुसंगत रहें. इससे आपके बच्‍चे को अहसास होगा कि अगर आप अभी बाहर गए हो तो वापिस उसके पास जरूर आओगे.

आप अपने बच्‍चों को जितने समय बाद वापिस आने के लिए कमिट करते हैं उतने समय में जरूर वापिस आ जाएं.

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