जन्मदिन स्पेशल: हॉस्पिटल में बीमार पड़ी आम लड़की के लिए गाने पहुंच गए थे मुकेश!

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अपनी सुरीली आवाज़ से आज भी संगीत प्रेमियों के दिल पर राज करने वाले सिंगर मुकेश (जिन्हें मुकेश चंद माथुर के नाम से भी जाना जाता है) का जन्म आज ही के दिन हुआ था। ‘दोस्त-दोस्त न रहा’, ‘जीना यहां मरना यहां’, ‘कहता है जोकर’, ‘दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई’, ‘आवारा हूं’, ‘मेरा जूता है जापानी’ जैसे खूबसूरत नगमों के सरताज मुकेश माथुर की आवाज की दीवानी पूरी दुनिया है।

50 के दशक में लोगों ने मुकेश की आवाज को अच्छी तरह से पहचान लिया। मुकेश की आवाज का लोगों पर कैसा जादू था उसका अंदाज़ आप इसी बात से लगा सकते हैं कि एक बार एक लड़की बीमार हो गई और अपनी मां से बोली कि अगर मुकेश आकर उसे अपना गाना सुनाएं तो वह ठीक हो सकती है। डॉक्टर से इस बात का पता चलने पर मुकेश तुरंत उस लड़की से मिलने पहुंच गए और उसके लिए गाया भी।

उनका जन्म 22 जुलाई, 1923 को दिल्ली में हुआ था। मुकेश के पिता जोरावर चंद्र माथुर पेशे से इंजिनियर थे और मुकेश उनके 10 बच्चों में छठे नंबर पर थे। मुकेश अपने सहपाठियों के बीच कुंदन लालसहगल के गीत सुनाया करते थे और अपनी आवाज का जादू उन्होंने सबपर चला रखा था। बहुत जल्द पता चल गया कि उनकी यह आवाज सिर्फ उनके दोस्तों के बीच गाने भर के लिए नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ों लोगों के होंठों और दिल में बस जाने के लिए था। उन्होंने दसवीं तक पढ़ाई कर पीडब्लूडी में नौकरी शुरू की थी, लेकिन उनकी ख्वाहिश थी कि वह हिंदी फिल्मों में बतौर ऐक्टर काम करें। कुछ ही साल बाद उन्होंने मायानगरी मुंबई की ओर रुख किया।

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