टॉम ऑल्टर की यह तमन्ना अधूरी ही रह गई

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यह तो सभी को ज्ञात ही है कि बॉलीवुड अभिनेता और थिएटर आर्टिस्ट ‘टॉम अल्टर’ का निधन हो गया है. काफी समय से टॉम स्किन कैंसर की चौथी और आखरी स्टेज से जूझ रहे थे. कई समय से टॉम मुंबई के सैफी अस्पताल में भर्ती थे और शुक्रवार को ही रात टॉम ने अंतिम सांस ली थी. टॉम की उम्र 67 वर्ष थी. टॉम ने बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1976 में फिल्म ‘चरस’ से की थी. उन्होंने अब तक 300 से ज्यादा फिल्मे और कई टीवी शो किये है. एक्टिंग के साथ-साथ टॉम लेखन का काम भी करते थे. टॉम को पद्मश्री अवार्ड से भी नवाज़ा जा चूका है. टॉम गिने-चुने विदेशी कलाकारों में से एक थे. दिवंगत अभिनेता टॉम ऑल्टर का जन्म वर्ष 1950 में मसूरी में हुआ था. वे भारत में तीसरी पीढ़ी के अमेरिकी थे. उन्होंने वूडस्टॉक स्कूल में पढ़ाई की और इसके बाद थोयेल यूनिवर्सिटी में पढ़े. सन 1972 में उन्होंने पुणे के प्रतिष्ठित फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट में एडमीशन लिया. अस्सी और नब्बे के दशक में उन्होंने खेल पत्रकारिता भी की. अंग्रेजी बोलने के साथ-साथ टॉम की उर्दू में भी बेहतरीन पकड़ थी. अधिकतर फिल्मो में टॉम ने अंग्रेजों का ही किरदार निभाया है. टॉम अपनी आखरी फिल्म मई साल 2017 में ‘सरगोशियां’ में नजर आये थे. उनके निधन से बॉलीवुड में शोक की लहर फैल गई है लेकिन यहां गोरखपुर में भी रंगकर्म से जुड़े तमाम लोग बेहद दु:खी हैं. नई दिल्ली में उनके थियेटर ग्रुप ‘पैरेट’ से पिछले सात साल से जुड़े गोरखपुर के नौजवान रंगकर्मी हिमांशु श्रीवास्तव ने बताया कि टॉम लम्बे समय से गोरखपुर आना चाहते थे. उनकी ख्वाहिश यहां गालिब के किरदार को मंच पर जीवंत करने की थी लेकिन आखिरकार यह ख्वाहिश अधूरी ही रह गई. कभी प्रायोजक न मिलने की वजह से तो कभी फिल्मों में व्यस्तता के कारण गोरखपुर आने का कार्यक्रम टलता रहा.

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