नववर्ष 2026 में हिन्दू पंचांग के अनुसार 12 मास के स्थान पर होंगे 13 मास। प्रत्येक वर्ष में 12 मास होते है किन्तु हर तीन वर्ष बाद एक ऐसा वर्ष आता है जिसमे 13 मास होते है। यह अतिरिक्त मास अधिकमास के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष हिन्दू पंचांग के अनुसार दो ज्येष्ठ मास होंगे। पंचांग के अनुसार अधिकमास 17 मई 2026 से प्रारंभ होकर 14 जून 2026 को समाप्त होगा।
अधिकमास का कारण हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष की गणना सूर्य और चंद्र की गति पर आधारित होती है। चंद्र वर्ष और सौर वर्ष की समयसीमा समान नहीं होती है। चंद्र मास चंद्र की गति के अनुसार तय होता है प्रत्येक चंद्र मास में 29 से 30 दिन होते है, कुल 12 चंद्र मास में एक चंद्र वर्ष पूर्ण होता है जिसमे 354 दिन होते है। दूसरी ओर एक सौर वर्ष में कुल 365 दिन होते है। दोनों वर्षो में लगभग 11 दिन का अंतर होता है। इस अंतर के कारण अधिकमास की उत्पत्ति होती है। जब यह अन्तर एक मास के बराबर हो जाता है तो पंचांग में इसे अतिरिक्त मास के रूप में जोड़ा जाता है।
यही अतिरिक्त मास अधिकमास कहलाता है। अधिकमास को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बहुत ही पावन और पवित्र माना जाता है। यह मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से प्रचलित है। इस मास में की गई पूजा, जप और भक्ति अधिक फलदायी मानी जाती है। इस मास में की गई साधना का अधिक महत्व होता है। इस मास में पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। विवाह, गृह प्रवेश और कोई अन्य मांगलिक कार्य इस मास में नहीं किए जाते है।