लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में हुआ घमासान, 10 घंटे की बहस शुरू

Highlights विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर सदन में बहस शुरू कराई। प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए आवश्यक 50 सांसदों का समर्थन मिलने के बाद चर्चा शुरू हुई। सरकार और विपक्ष के बीच स्पीकर की निष्पक्षता को लेकर तीखी बहस देखने को मिली।

संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में आज बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर सदन में बहस शुरू कर दी है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि स्पीकर ने सदन चलाने में निष्पक्षता नहीं दिखाई, वहीं सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मंगलवार सुबह सदन की कार्रवाई प्रश्नकाल से शुरू हुई। इसके बाद विपक्ष की ओर से स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव पेश करने की तैयारी शुरू हो गई। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि अब वे सदन के सभी पक्षों का विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी निष्पक्षता नहीं दिखा पा रहे हैं। नियमों के मुताबिक, प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है।

जब आवश्यक संख्या में सांसद खड़े हुए तो प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई ने इस प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ नहीं है, बल्कि सदन की गरिमा को बनाए रखने के लिए लाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सदन के लगभग सभी सदस्यों के साथ स्पीकर के व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं, लेकिन फिर भी विपक्ष को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सदन की कार्रवाई के दौरान कई बार विपक्ष को बोलने के पर्याप्त मौके नहीं मिले। विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि स्पीकर पूरी तरह निष्पक्ष हैं और उन्होंने नियमों के अनुसार ही सदन को चलाया है।

बहस के दौरान गौरव गोगोई ने कहा कि भविष्य में जब भी संसदीय रिकॉर्ड की जांच होगी, आंकड़े बताएंगे कि किरेन रिजिजू संसदीय कार्य मंत्री के रूप में विपक्ष को सबसे ज्यादा टोकने वाले मंत्री थे। इसके जवाब में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खड़े हुए और बोले, “मैं सहमत हूं, संसदीय कार्य मंत्री के रूप में किरेन रिजिजू जी ने सबसे ज्यादा टोका है। लेकिन हमने इतना गैर-जिम्मेदार विपक्ष भी कभी नहीं देखा।” किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा, “सदन में विपक्ष के नेता ने कहा था कि उन्हें सदन में बोलने के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। चाहे वह प्रधानमंत्री हों, विपक्ष के नेता हों या कोई अन्य सांसद, लेकिन स्पीकर की अनुमति के बिना सदन में कोई नहीं बोल सकता।”

बहस शुरू होने के कुछ ही समय बाद लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही थोड़ी देर के लिए स्थगित भी करनी पड़ी। बाद में दोपहर 2 बजे फिर से सदन की कार्यवाही शुरू हुई और चर्चा जारी रही। वायनाड से सांसद और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने राहुल गांधी का बचाव किया और सत्ताधारी पक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा, “पिछले 12 वर्षों में देश में केवल एक ही व्यक्ति है जिसने सरकार के सामने सिर नहीं झुकाया है, और वह हैं विपक्ष के नेता।” उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पक्ष "संसद में उनके द्वारा बोले गए सत्य को स्वीकार नहीं कर सकता।"

लोकसभा में इस प्रस्ताव पर कुल 10 घंटे की चर्चा तय की गई है। बहस के बाद इस पर मतदान भी कराया जा सकता है। गौरतलब है कि विपक्ष ने बजट सत्र के पहले चरण में ही इस प्रस्ताव का नोटिस दिया था, जिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर थे। अब इस मुद्दे पर संसद में तीखी बहस होने की संभावना है। इस पूरे घटनाक्रम ने बजट सत्र के दूसरे चरण को राजनीतिक रूप से काफी गर्म बना दिया है और आने वाले घंटों में इस पर और तीखी चर्चा देखने को मिल सकती है।

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