भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में आज से एक नए दौर की शुरूआत हो चुकी है। बिहार के दिग्गज नेता और 5 बार के विधायक नितिन नबीन को औपचारिक रूप से भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया जा चुका है। 45 साल की उम्र में ये ज़िम्मेदारी संभालने वाले वे भाजपा इतिहास के सबसे युवा अध्यक्ष बन चुके है। नितिन फिलहाल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी संभाल रहे थे। नामांकन प्रक्रिया के दौरान उनके पक्ष में नॉमिनेशन पेपर्स के सभी 37 सेट मिले। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे बड़े नाम शामिल थे। सामने कोई अन्य उम्मीदवार खड़े न होने के कारण उनका निर्विरोध चुना जाना पहले ही तय हो चुका था।
उनकी ताजपोशी के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सभी केंद्रीय मंत्री, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय महासचिव समेत कई दिग्गज नेता भी नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में मौजूद रहे। प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री शाह जैसे दिग्गज नेताओं ने उन्हें पुष्प मालाएं पहनकर बधाई दी। इससे पूर्व नितिन ने नई दिल्ली के प्रसिद्ध झंडेवालान् मंदिर और हनुमान मंदिर में जाकर दर्शन और पूजा-अर्चना की। उन्होंने गुरुद्वारा बंगला साहिब में जाकर मत्था भी टेका।
नितिन नबीन का राजनीति से पुराना नाता रहा है। उनके पिता नवीन/नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा भी भाजपा के कद्दावर नेता और 4 बार पटना वेस्ट से विधायक रहे हैं। 2006 में पिता के निधन के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 2006 से 2010 तक पटना वेस्ट और बाद में 2010 से अब तक लगातार बाँकीपुर सीट से विधायक रहे हैं। वे बिहार सरकार में शहरी विकास एवं आवास मंत्री और सड़क निर्माण मंत्री भी रह चुके हैं।
नितिन नबीन को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। अब तक गृह मंत्री अमित शाह (49-50 वर्ष) के नाम सबसे युवा अध्यक्ष होने का रिकॉर्ड था, जिसे नितिन ने तोड़ दिया है। पार्टी ये बताना चाह रही है कि उसे शीर्ष नेतृत्व पद के लिए युवाओं पर भरोसा है और एक साधारण कार्यकर्ता भी अपनी मेहनत के बल पर राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकता है।
नितिन नबीन ऐसे समय में पार्टी की कमान संभाल रहे हैं, जब भाजपा को आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारी करना है। उनके सामने NDA को एकजुट रखने, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन के साथ असम विधानसभा चुनावों में भाजपा की हैट्रिक और 2027 में उत्तर प्रदेश में पुनः भाजपा की विजय जैसे बड़े और अहम लक्ष्य होंगे।