भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में मशहूर हुए इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था, कि अब पास के ही महू (डॉ. आंबेडकर नगर) में भी दूषित जल ने कहर बरपाया है। भागीरथपुरा में हुई दुःखद घटना के बाद अब महू के कई क्षेत्रों में गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायतें मिल रही हैं, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ रहे हैं। महू के पट्टी/पत्ती बाज़ार, चंदर मार्ग और मोती महल जैसे इलाकों में पिछले कुछ दिनों से नलों में मटमैला और दुर्गंध वाला पानी आ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पीने के पानी की पाइपलाइन में नाली का गंदा पानी मिल रहा है। जानकारी के मुताबिक, दूषित पानी के कारण अकेले चंदर मार्ग में ही 250 घर सीधे तौर पर प्रभावित हो गए हैं।
गंदा पानी पीने से अब तक 25 लोग बीमार पड़ चुके हैं। इनमें 19 बच्चे भी शामिल है और इन बच्चों में से 6 तो एक ही परिवार के है। बीमार पड़े लोगों में पीलिया और टायफाइड जैसी गंभीर बीमारियों के लक्षण देखे जा रहे हैं। एक बच्ची संक्रमण के कारण अपनी प्रीबोर्ड की परीक्षा भी नहीं दे सकी। 3 बच्चों की हालत बिगड़ने पर उन्हें इंदौर रैफर किया गया है। बच्चों के अलावा एक बुज़ुर्ग को भी लिवर में संक्रमण के कारण इंदौर भेजा गया है। महू में स्थिति बिगड़ने की खबर मिलते ही स्थानीय विधायक उषा ठाकुर और इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा वहां पहुंचे। उन्होंने वहां मरीज़ों का हल जाना और दवाइयां व तत्काल इलाज उपलब्ध कराने के आदेश दिए।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही है और लोगों से बातचीत कर रही है। कई घरों में लोगों को उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायतें हैं। ये टीमें मरीज़ों को तुरंत दवाइयां उपलब्ध करा रही हैं और जो मरीज़ ज़्यादा गंभीर है, उन्हें अस्पताल भेजा जा रहा है। इंदौर में हुई मौतों के बाद लोग पहले ही चिंतित थे, अब महू में भी कुछ वैसे ही स्थिति देखकर लोगों में अत्यंत भय का माहौल है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पानी की गुणवत्ता को लेकर पहले ही शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि पानी की पाइपलाइन नालियों के बीच से होकर गुज़र रही हैं। फिलहाल दूषित पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। प्रशासन ने अपील की है कि पानी को उबालकर ही पिएं और यदि किसी बीमारी के लक्षण दिखे तो तुरंत जांच कराएं।