धारा 370 हटने के 6 वर्ष पूर्ण, विकास के पथ पर अग्रसर जम्मू-कश्मीर

Highlights धारा 370 हटने के बाद ₹80,000 करोड़ का निवेश, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा। चिनाब ब्रिज, जोजी ला, बनिहाल-काजीगुंड सुरंगें, यूएसबीआरएल का निर्माण। धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में सरकार का जोर जनकल्याण, लोकतंत्र को सशक्त किया।

नई दिल्ली : अंग्रेजों के जाने के पश्चात भारत में कई रियासतों को एकजुट करने में सरदार पटेल और पंडित नेहरू की राजनीतिक-कूटनीतिक पहल कामयाब हो गई। लेकिन जम्मू-कश्मीर का मसला अब पूरी तरह से सुलझ चुका है। धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले इस राज्य के राजा हरि सिंह ने इसे स्वतंत्र रखने का प्रयास किया है। लेकिन मुस्लिम बहुल कश्मीर पर पाकिस्तान की भी निगाह थी। पाकिस्तानी सेना ने कबायलियों के माध्यम से कश्मीर पर अटैक कर दिया। जब राजा हरि सिंह की सत्ता खतरे में आ गयी, तब उन्होंने भारत में विलय की सहमति दी। इसी तरह जम्मू-कश्मीर भारत का भाग बना, लेकिन धारा 370 के अंतर्गत इसे विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।

वहीं धारा 370 के कारण जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग होने के बावजूद वहाँ कई केंद्रीय कानून लागू नहीं किए गए थे। वर्ष 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार के निरंतर दूसरी बार सत्ता में आने के पश्चात केंद्र ने धारा 370 को खत्म कर दिया। अब इस विशेष दर्जे के हटने के छह वर्ष पूरे होने वाले हैं। ऐसे में यह सवाल प्रासंगिक है कि धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में कितना परिवर्तन आया है। इस रिपोर्ट में इसी विषय पर चर्चा की गई है।

इतना ही नहीं 5 अगस्त वर्ष 2019 को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के 6 वर्ष पूरे हो चुके है। इस निर्णय ने जम्मू-कश्मीर में शासन, बुनियादी ढांचे और नागरिक सहभागिता में व्यापक परिवर्तन लाया। इसके अंतर्गत राज्य का विशेष दर्जा खत्म कर उसे पूर्ण रूप से भारतीय संविधान के दायरे में भी शामिल किया जा चुका है।

धारा 370 हटने के पश्चात जम्मू-कश्मीर में सरकार का जोर जनकल्याण, लोकतंत्र को सशक्त करने और आर्थिक विकास पर रहा था, भले ही राजनीतिक बहस जारी थी। सबसे उल्लेखनीय परिवर्तनों में से एक है लोकतांत्रिक भागीदारी में वृद्धि। धारा 370 के हटने से विकास की गति तेज हो गई। परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधानसभा चुनाव आयोजित किए गए। साथ ही, आतंकवादी घटनाओं में भी कमी देखी गई।

धारा 370 हटने के पश्चात जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनावों में 70% से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया। 2020 में जिला विकास परिषद (DDC) चुनाव एक महत्वपूर्ण कदम था। 2024 के विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक सहभागिता को और सशक्त कर दिया, जिसमें दक्षिण कश्मीर के उभरते सरपंचों सहित युवाओं एवं महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखी गई। 

विकास ने भी गति पकड़ी :

इतना ही नहीं IIT जम्मू, एम्स अवंतीपोरा (2025 तक शुरू होने की संभावना), और रियासी में मेडिकल कॉलेज ने शिक्षा के अवसरों को और भी ज्यादा बढ़ाया है। दूरदराज के इलाके से UPSC क्वालिफायर उभरे, और जॉब फेयर ने स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन दिया, जिनमें कई महिला उद्यमी भी शामिल है।

वर्ष 2019 के पश्चात 80 हजार करोड़ का सरकार ने किया निवेश : 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में 80,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जिसने रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा दिया। बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आई, और उदहमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) अब पूरी तरह कार्यरत है, जो कश्मीर घाटी को देश से जोड़ता है।कई सुरंगों का निर्माण हुआ, और पर्यटन ने गति पकड़ी। जोजी ला टनल (2026 तक पूर्ण होने की उम्मीद), जोड-मोर्ह टनल, और बनिहाल-काजीगुंड रोड टनल जैसे प्रोजेक्ट्स ने आवागमन को सुगम बनाया। मार्च 2025 तक भारतनेट के तहत 9,789 फाइबर-टू-होम कनेक्शन शुरू हुए, जिससे डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ी। साथ ही, पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, और 2024 में यूनेस्को ने श्रीनगर को 'वर्ल्ड क्राफ्ट सिटी' का दर्जा दिया।

सुरंगों का निर्माण : 

कई सुरंगों का निर्माण किया, एवं पर्यटन ने गति पकड़ी। जोजी ला टनल (2026 तक पूर्ण होने की उम्मीद), जोड-मोर्ह टनल, और बनिहाल-काजीगुंड रोड टनल जैसे प्रोजेक्ट्स ने आवागमन को सुगम बना दिया है। मार्च 2025 तक भारतनेट के तहत 9,789 फाइबर-टू-होम कनेक्शन शुरू हुए, जिससे डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ गई। साथ ही, पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, और 2024 में यूनेस्को ने श्रीनगर को 'वर्ल्ड क्राफ्ट सिटी' का दर्जा दिलवाया है।

दुनिया का सबसे ऊंचा चिनाब ब्रिज तैयार :

चिनाब ब्रिज, जिसकी ऊंचाई 359 मीटर है, एफिल टॉवर से भी अधिक है। यह 1,315 मीटर लंबा स्टील आर्च ब्रिज है, जो भूकंप और तेज हवाओं का सामना करने में सक्षम है। इसके साथ ही वंदे भारत ट्रेनों का संचालन भी शुरू हुआ।

आतंकवादी घटनाओं में कमी, लेकिन पूर्ण समाप्ति की प्रतीक्षा : 

चुनाव और विकास की प्रगति के बीच आतंकवाद की चर्चा भी जरूरी है, जिसने जम्मू-कश्मीर के कई साल प्रभावित किए। धारा 370 हटने के बाद आतंकवादी घटनाओं में कमी आई है, लेकिन इसका पूर्ण अंत अभी बाकी है। धारा 370 हटने के पश्चात भी पहलगाम जैसे आतंकी हमले हुए, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की क्रूर हत्या कर दी है।

पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान पर जोरदार प्रहार किया। इससे तिलमिलाए पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, लेकिन भारत ने इसका करारा जवाब दिया। अब कश्मीर विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उम्मीद है कि धरती का स्वर्ग हमेशा स्वर्ग बना रहेगा और मानवता को हर हाल में कायम रखेगा।

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