स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी की त्रासदी, भागीरथपुरा में मौतों का आंकड़ा 35 तक पहुंचा

Highlights दूषित पानी पीने से भागीरथपुरा में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है। इलाके में पानी की पाइपलाइन में सीवेज का पानी मिल गया था। हादसे को एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन मौतों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है।

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से मची त्रासदी ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। स्वच्छ भारत अभियान में लगातार नंबर-1 रहने वाले शहर में इस तरह की घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 35 हो चुकी है, जिससे इलाके में शोक का माहौल है।

हालिया मौतों में एक 75 वर्षीय बुजुर्ग और महज 2 साल की एक मासूम बच्ची भी शामिल हैं। बुजुर्ग की पहचान शालिग्राम ठाकुर के रूप में हुई है, जिनका सोमवार रात निधन हो गया। परिजनों के मुताबिक, शालिग्राम ठाकुर को 2 जनवरी को शेल्बी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, बाद में उन्हें बॉम्बे अस्पताल रेफर किया गया। वहां वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहे और करीब 12 दिन पहले उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। हालांकि बॉम्बे अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उन्हें पहले से ही दिल से जुड़ी गंभीर बीमारी थी।

वहीं 2 वर्षीय बच्ची रिया प्रजापति का आज तड़के निधन हो गया। उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद रिया को 27 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में उनकी हालत में सुधार हुआ, लेकिन बाद में तबीयत बिगड़ने लगी। करीब 15 दिन पहले उन्हें नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने लिवर से जुड़ी कॉम्प्लिकेशन्स की पुष्टि की। इसके बाद उन्हें एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां पांच दिन बाद उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि दूषित पानी के सेवन से रिया की तबीयत बिगड़ी और इसका सीधा असर उनके लीवर पर पड़ा।

जांच में यह बात सामने आई थी कि भागीरथपुरा इलाके में पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवेज का पानी मिल गया था। यही दूषित पानी इलाके के घरों में सप्लाई किया जा रहा था। इस पानी के संपर्क में आने वाले लोग एक-एक कर बीमार पड़ने लगे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। देखते ही देखते मौतों का सिलसिला शुरू हो गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले भी गंदे पानी की शिकायत प्रशासन से की थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन की इसी लापरवाही की कीमत कई लोगों को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी। हादसे को एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद मौतों का सिलसिला अब तक थमता नजर नहीं आ रहा है।

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