पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में पिछले दो दिनों से जारी हिंसा और सैन्य कार्रवाई में 140 से अधिक विद्रोहियों के मारे जाने की पुष्टि की गई है। ये कार्रवाई तब शुरू हुई, जब अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने प्रांत के कई हिस्सों में एकसाथ कोऑर्डिनेटेड हमले किए थे। BLA ने अपने इस ऑपरेशन को "ऑपरेशन हेरोफ 2" नाम दिया था। इसके तहत 31 जनवरी 2026 को क्वेटा, ग्वादर और मस्तंग समेत कई जिलों को एकसाथ निशाना बनाया गया था।
हमलावरों ने पुलिस स्टेशनों, उच्च सुरक्षा वाली जेलों, आम नागरिकों वाले क्षेत्रों, सरकारी प्रतिष्ठानों और सिक्योरिटी इंस्टॉलेशंस पर हमले किए थे। हमलावरों ने बंदूकों, ग्रेनेडों यहां तक कि सुसाइड जैकेट्स का भी उपयोग किया था। BLA द्वारा वीडियो भी जारी किए गए थे, जिसमें महिला लड़ाके भी भाग लेती हुई दिखाई दीं। इन मुठभेड़ों में 80 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने और 15-18 लोगों को बंधक बनाए जाने की खबर है। इनके अलावा कई सुरक्षाकर्मी घायल भी हुए।
इन हमलों के बाद पाकिस्तान प्रशासन ने काउंटर-ऑपरेशन शुरू किया। प्रांत के मुख्यमंत्री सरफराज़ बुग्ती ने कहा कि पिछ्ले करीब 40 घंटों में मुठभेड़ों और सर्च ऑपरेशन्स में 140 से अधिक विद्रोही मारे जा चुके हैं। पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि BLA हमलावरों के प्रमुख शहरी इलाकों पर कब्ज़ा करने की कोशिश को नाकाम कर दिया गया है। इन मुठभेड़ों में आम नागरिकों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। हिंसा में 31 लोगों के मारे जाने की खबर है। इनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल बताए जा रहे हैं। 20 से अधिक गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया गया था।
पाकिस्तान ने बिना कोई सबूत दिए आरोप लगाया कि ये हमले भारत समर्थित आतंकवादियों ने किए थे, जिन्हें भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हम पाकिस्तान द्वारा लगाए गए निराधार आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं, जो उसकी आंतरिक नाकामियों से ध्यान हटाने की सामान्य रणनीति के अलावा और कुछ नहीं हैं। उन्हें हिंसा की हर घटना पर बेबुनियाद दावों को दोहराने के बजाय, क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। दमन, क्रूरता और मानवाधिकारों के उल्लंघन का उनका इतिहास सभी जानते हैं।"