पैक्स सिलिका में हुई भारत की एंट्री : टेक पावरहाऊस बनने की ओर बढ़ाया कदम

Highlights भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल होने पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते से एआई, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई मजबूत होगी। भारत को ग्लोबल टेक सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका और दुर्लभ मिनरल्स तक आसान पहुंच मिलेगी।

भारत के लिए आज एक बहुत बड़ी और गर्व वाली खबर सामने आई है। भारत ने औपचारिक रूप से अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका (Pax Silica) में शामिल होने का फैसला किया है। शुक्रवार 20 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस कदम को न केवल भारत की अर्थव्यवस्था बल्कि दुनियाभर की तकनीक की दुनिया में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। सरल शब्दों में कहें तो पैक्स सिलिका दुनिया के उन खास देशों का समूह है, जो भविष्य की तकनीक जैसे एआई, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई को सुरक्षित बनाना चाहते हैं। इन देशों में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, इजराइल, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश भी शामिल हैं।

पैक्स का मतलब होता है शांति और सिलिका का संबंध कंप्यूटर चिप्स से है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य ये सुनिश्चित करना है कि आने वाले समय में एआई और चिप्स के लिए जरूरी सामान की कमी न हो और किसी एक देश पर निर्भरता को कम किया जा सके। भारत के आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और अमेरिका के अधिकारियों के बीच हुई इस डील से भारत को काफी फायदा मिलने की संभावना है। अब भारत को दुर्लभ मिनरल्स तक आसान पहुंच मिलेगी। इससे पहले भारत को इन चीजों के लिए काफी हद तक दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब भारत खुद ही इस ग्लोबल सप्लाई चैन का एक मजबूत हिस्सा बन गया है।

इस मौके पर अश्विनी वैष्णव ने कहा, "आज हमारे प्रतिभाशाली इंजीनियर भारत में सबसे जटिल और सबसे उन्नत 2-नैनोमीटर चिप्स डिजाइन कर रहे हैं। हम सब जानते हैं कि सेमीकंडक्टर उद्योग को लगभग 10 लाख और प्रतिभाशाली लोगों की आवश्यकता होगी। ये प्रतिभा कहाँ से आएगी? यहीं से आएगी। आज छात्रों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सेमीकंडक्टर डिजाइन उपकरण मुफ्त में उपलब्ध हैं और इसके परिणाम दिख रहे हैं। देश के पास एक दिशा है, एक स्पष्ट लक्ष्य है और हमें सेमीकंडक्टर उद्योग और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है।" कुल मिलाकर, पैक्स सिलिका में भारत की एंट्री यह दिखाती है कि अब दुनिया भारत को सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि एक "टेक पावरहाउस" के रूप में देख रही है। यह भारत के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया मिशन को एक नई उड़ान देने वाला कदम है।

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