केरलम विधानसभा चुनाव : भाजपा के 47 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी, कई दिग्गज नेताओं को मिला टिकट

Highlights के. सुरेंद्रन को भाजपा ने मंजेश्वर सीट से उम्मीदवार बनाया, वे पहले भी तीन बार यहां से चुनाव लड़ चुके है। शोभा सुरेंद्रन को पलक्कड़ सीट से टिकट मिला, पार्टी को उनके अनुभव और बढ़ते वोट शेयर से जीत की उम्मीद। राजीव चंद्रशेखर और वी. मुरलीधरन जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी प्रमुख सीटों से मैदान में उतारा गया।

केरलम में इस साल अप्रैल में होने वाले विधान सभा चुनावों को लेकर अब सियासी पारा धीरे-धीरे चढ़ने लगा है। चुनावों और नतीजों की तारीखें भी पहले ही घोषित हो चुकी हैं। 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान और 4 मई को चुनावी नतीजे घोषित किए जाएंगे। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी चुनावों के लिए 47 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। जानकारी के लिए बता दें कि भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक 12 मार्च को नितिन नबीन की अध्यक्षता में हुई थी। इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य उपस्थित थे। इस सूची में भाजपा के कई अनुभवी नेताओं के नाम शामिल हैं। आइए एक नजर डालते हैं कुछ चुनिंदा और प्रमुख उम्मीदवारों पर।

सबसे पहले बात करते हैं भाजपा-केरलम के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन की। वे फरवरी 2020 से मार्च 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर काम कर चुके हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्टूडेंट विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की थी। पार्टी ने अपने इस बेहद अनुभवी नेता को मंजेश्वर सीट से उम्मीदवार बनाया है। बता दें कि सुरेंद्रन इससे पूर्व 3 बार 2011, 2016 और 2021 में इसी सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। जहां 2011 में उन्हें 5,828 वोटों के ठीक-ठाक अंतर से पराजय मिली थी, वहीं 2016 में यह आंकड़ा मात्र 89 वोटों का रह गया था और 2021 में भी उन्हें 745 वोटों से ही पराजय मिली थी। पिछले कुछ समय से राज्य में भाजपा के प्रदर्शन में निरंतर सुधार देखने को मिल रहा है। ऐसे में पार्टी ने इस बार उन्हें इसी उम्मीद से इस सीट पर प्रत्याशी बनाया होगा कि शायद वे पहली जीत का स्वाद चख ही लें। सुरेंद्रन कई लोक सभा चुनाव भी लड़ चुके हैं, जहां अलग-अलग चुनावों में उन्हें 1 से 3 लाख के बीच वोट भी प्राप्त हुए, हालांकि ये वोट जीत के लिए पर्याप्त नहीं थे।

इस सूची में अगला नाम आता है शोभा सुरेंद्रन का। पार्टी द्वारा उन्हें पलक्कड़ सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। शोभा विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी भागीदारी के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया हुआ है। शोभा ने RSS से जुड़ने और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ अपनी गतिविधियों के बाद भाजपा से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। अपने 30 साल के राजनीतिक जीवन में महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष के अलावा 2015 से 2021 तक भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य, भाजपा राज्य सचिव और भाजपा राज्य उपाध्यक्ष के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। 2025 में उन्हें एक बार फिर भाजपा का राज्य महासचिव बनाया गया है। इससे पहले वे 2016 से 2020 तक इस पद पर काम कर चुकी हैं। वे भी कई लोक सभा और विधान सभा चुनावों में अपनी किस्मत आजमा चुकी हैं। उनके प्रदर्शन में भी निरंतर सुधार देखने को मिला है। 2024 के लोक सभा चुनावों में भी उन्हें 2 लाख 99 हजार से अधिक वोट मिले थे। पार्टी उनसे यही उम्मीद कर रही होगी कि अंततः वे भी चुनाव में जीत हासिल करें।

अब बारी आती है भाजपा-केरलम के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर की। पार्टी ने उन्हें नेमोम सीट से प्रत्याशी बनाया है, जहां भाजपा का प्रदर्शन सबसे अच्छा देखने को मिलता है। 2016 से 2021 तक पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओ. राजगोपाल इस सीट से विधायक भी रहे हैं, जो राज्य में भाजपा के गठन के बाद पार्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है। मार्च 2025 में उन्हें पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, जहां उनके नेतृत्व में पहली बार राजधानी तिरूवनंतपुरम में नगर निकाय चुनावों में जीत हासिल हुई और पहली बार भाजपा का मेयर भी बना। इसे देखते हुए भाजपा को यही उम्मीद होगी कि नगर निकाय चुनावों के परिणाम विधान सभा चुनावों में भी देखने को मिलेंगे। राजीव 2006 से 2024 तक कर्नाटक से भाजपा के राज्य सभा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री भी रहे हैं। 2024 के लोक सभा चुनावों में उन्हें तिरुवनंतपुरम लोक सभा सीट से प्रत्याशी बनाया गया था, जहां उन्हें उसी सीट से सांसद डॉ. शशि थरूर ने 16,077 वोटों से पराजित किया था।

अंत में नाम आता है वी. मुरलीधरन का। मुरलीधरन भी 2010 से 2015 तक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर काम कर चुके हैं। मुरलीधरन अपने स्कूल के दिनों से ही ABVP से जुड़े रहे हैं। वे अपने राज्य में ABVP के संगठन सचिव, अखिल भारतीय सचिव और अखिल भारतीय महासचिव के तौर पर भी काम कर चुके हैं। वे 2006 से 2010 तक भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर भी काम कर चुके हैं। बाद में 2018 से 2024 तक राज्य सभा सांसद रहे और विदेश मंत्रालय व संसदीय कार्य मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री भी रहे हैं। ताजा चुनाव की ही बात करें तो 2024 में ही अट्टिंगल लोक सभा सीट से उन्होंने चुनाव लड़ा और 3 लाख 10 हजार से अधिक वोट हासिल किए।

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