नेहरू ट्रॉफी बोट रेस केरल की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर साल अलप्पुझा के पुन्नमदा झील में आयोजित किया जाता है। यह आयोजन न केवल एक रोमांचक खेल है, बल्कि केरल की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का भी प्रतीक है।
इतिहास :
नेहरू ट्रॉफी बोट रेस का इतिहास 1952 में शुरू हुआ, जब भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अलप्पुझा का दौरा किया था। उनके सम्मान में आयोजित एक जल शो में नेहरू ने सांप की तरह दिखने वाली नावों की दौड़ देखी और वे बहुत प्रभावित हुए। इसके बाद, नेहरू ने विजेताओं के लिए एक ट्रॉफी भेंट की, जो आज भी इस आयोजन का मुख्य आकर्षण है।
आयोजन :
नेहरू ट्रॉफी बोट रेस आमतौर पर अगस्त के दूसरे शनिवार को आयोजित की जाती है, लेकिन इस साल यह 30 अगस्त को आयोजित की जाएगी। इस आयोजन में विभिन्न प्रकार की नावें भाग लेती हैं, जिनमें से सबसे प्रमुख हैं चुंडनवल्लम, जो लगभग 100 फीट लंबी होती हैं और जिनमें 100 से अधिक नाविक होते हैं।
सांस्कृतिक महत्व :
नेहरू ट्रॉफी बोट रेस न केवल एक खेल आयोजन है, बल्कि केरल की संस्कृति और परंपराओं का भी प्रतीक है। इस आयोजन में पारंपरिक संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होते हैं, जो दर्शकों को केरल की समृद्ध संस्कृति से परिचित कराते हैं।
रोमांच और उत्साह :
नेहरू ट्रॉफी बोट रेस एक रोमांचक आयोजन है, जिसमें दर्शकों को नावों की गति और नाविकों की कुशलता का प्रदर्शन देखने को मिलता है। इस आयोजन में भाग लेने वाले नाविक अपनी नावों को जीतने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और दर्शकों को उनकी जीत के लिए उत्साहित करते हैं।
टिकट और दर्शक :
नेहरू ट्रॉफी बोट रेस के लिए टिकट विभिन्न श्रेणियों में उपलब्ध होते हैं, जिनमें टूरिस्ट गोल्ड, टूरिस्ट सिल्वर, रोज़ कॉर्नर, विक्ट्री लाइन, ऑल व्यू, लेक व्यू और लॉन शामिल हैं। दर्शकों को आयोजन स्थल पर पहुंचने से पहले अपनी टिकटें खरीदनी होती हैं और वे आयोजन के दौरान विभिन्न सुविधाओं का आनंद ले सकते हैं।
नेहरू ट्रॉफी बोट रेस के विजेता :
नेहरू ट्रॉफी बोट रेस के विजेताओं को नेहरू ट्रॉफी से सम्मानित किया जाता है, जो एक सांप की तरह दिखने वाली नाव की प्रतिकृति है। इस आयोजन के कुछ प्रमुख विजेताओं में करिचल चुंडन, कुमराकोम टाउन बोट क्लब और पल्लाथुरुथी बोट क्लब शामिल हैं।
नेहरू ट्रॉफी बोट रेस केरल की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो न केवल एक रोमांचक खेल है, बल्कि केरल की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का भी प्रतीक है। इस आयोजन को देखने के लिए दर्शकों को अलप्पुझा के पुन्नमदा झील पर पहुंचना होता है, जहां वे नावों की गति और नाविकों की कुशलता का प्रदर्शन देख सकते हैं।