लैंड फॉर जॉब केस : लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत अन्य के खिलाफ आरोप तय

Highlights "लैंड फॉर जॉब" केस में लालू, राबड़ी, तेजस्वी समेत 41 लोगों पर आरोप तय किये गए है। अदालत के मुताबिक, सरकारी नौकरियों को परिवार के लिए ज़मीनें हड़पने के लिए औज़ार के तौर पर इस्तेमाल किया गया था। अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 जनवरी को होगी, जहां औपचारिक रूप से आरोप पढ़े जाएंगे।

दिल्ली की एक अदालत ने आज "लैंड फॉर जॉब" मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने लालू परिवार पर आरोप तय करने का आदेश देते हुए कहा कि यह पूरा मामला एक "क्रिमिनल इंटरप्राइज" की तरह चलाया जा रहा था। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया। अदालत के मुताबिक, सरकारी नौकरियों को परिवार के लिए ज़मीनें हड़पने के लिए औज़ार के तौर पर इस्तेमाल किया गया था। अदालत ने माना कि ये एक सोची समझी साजिश थी, जिसमें रेलवे अधिकारियों और करीबियों के साथ मिलकर ज़मीनों का सौदा किया गया था।

इस मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटों तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और बेटियों हेमा यादव और मीसा भारती समेत 41 लोगों पर आरोप तय किए गए है। हालांकि पुख्ता सबूतों के अभाव में 52 लोगों को बरी भी कर दिया गया है। जिन पर आरोप तय हुए हैं, उनके खिलाफ नियमित ट्रायल भी शुरू किया जाएगा। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, ये घोटाला 2004 से 2009 के बीच हुआ था। आरोप है कि ग्रुप-डी के पदों पर बिना किसी तय प्रक्रिया या विज्ञापन की लोगों को नौकरियां दी गई। इसके बदले में उम्मीदवारों या उनके परिवारों से यादव परिवार के सदस्यों के नाम पर बेहद कम कीमतों पर ज़मीनें लिखवाई गई या उपहार के रूप में ली गई।

लालू परिवार के ऊपर आरोप तय होने के बाद अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव का इस्तीफा मांगा है। जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, "जो आरोप न्यायालय ने तय किए हैं वह गंभीर हैं। लालू प्रसाद यादव को सबसे पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहिए। राबड़ी देवी भी इस मामले में अभियुक्त हैं उन्हें भी बिहार विधान परिषद में विधायक दल के नेता से इस्तीफा देना चाहिए। तेजस्वी यादव विधानमंडल दल के नेता हैं, उनको भी इस्तीफा देना चाहिए।"

बात करें लालू की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की तो, उनके प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि जो लोग लालू परिवार से राजनीतिक रूप से मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं, वे उनके खिलाफ जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 जनवरी को होगी, जहां औपचारिक रूप से आरोप पढ़े जाएंगे। इस फैसले को लालू परिवार के लिए एक बड़ा क़ानूनी झटका माना जा रहा है।

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