अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने किया सदन को संबोधित

Highlights स्पीकर ने बताया कि सदन में कोई व्यक्ति किसी मुद्दे पर बयान देना चाहता है तो उसे नियम 372 के तहत अनुमति लेनी होगी। ओम बिरला ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके कार्यकाल में महिला सांसदों की संख्या सबसे अधिक रही है। स्पीकर ने कहा कि उनकी कोशिश रही है कि छोटे से छोटे दल के सांसद को भी अपनी बात रखने का मौका मिले।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ सदन में लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है। विपक्षी दलों ने स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने का नोटिस दिया था, लेकिन ध्वनिमत से मतदान के बाद यह प्रस्ताव खारिज हो गया। प्रस्ताव खारिज होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि यह सदन 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने कहा, "स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में तीसरी बार लोकसभा सदस्यों ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिनों में 12 घंटे से अधिक चर्चा की। यह सदन भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। यहां उपस्थित प्रत्येक सदस्य भारतीय नागरिकों का जनादेश लेकर आया है।" ओम बिरला ने कहा कि सदन में बोलना लोकतंत्र के संकल्प को मजबूत करता है और सरकार की जवाबदेही भी सुनिश्चित करता है। यह सदन विचारों के आदान-प्रदान का एक जीवंत मंच रहा है। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा सदन की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा बनाए रखने का प्रयास करता हूं।"

उन्होंने आगे कहा, "सदन द्वारा मुझ पर दिखाए गए विश्वास के लिए मैं सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करता हूं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि इस विश्वास को अपना दायित्व मानते हुए पूरी निष्ठा, निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करूंगा।" स्पीकर ने यह भी बताया कि सदन में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह प्रधानमंत्री हो या मंत्री, यदि किसी जनहित के मुद्दे पर बयान देना चाहता है तो उसे नियम 372 के तहत अध्यक्ष से अनुमति लेनी होती है। उन्होंने कहा, "हमें संसद में बोलने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता सदन के नियमों और स्थायी आदेशों के अधीन है।"

ओम बिरला ने यह भी कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके कार्यकाल में महिला सांसदों की संख्या सबसे अधिक रही है और सभी महिला सदस्यों को अपने विचार रखने का अवसर मिला है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सदन को निलंबन जैसे कड़े फैसले क्यों लेने पड़े और अपील की कि सभी सदस्य सदन की गरिमा बनाए रखें।

प्रस्ताव गिरने के बाद जब ओम बिरला दोबारा अपनी कुर्सी पर बैठे तो उन्होंने साफ कहा कि स्पीकर का पद किसी पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे सदन का होता है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा नियमों के अनुसार काम करते हैं और सदन की गरिमा बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। बिरला ने यह भी स्पष्ट किया कि स्पीकर के पास किसी का माइक बंद करने का कोई अलग बटन नहीं होता, बल्कि सभी फैसले तय प्रक्रियाओं के अनुसार होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि छोटे से छोटे दल के सांसद को भी अपनी बात रखने का पूरा मौका मिले।

Related News