महाराष्ट्र की राजनीति से बहुत ही हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। राज्य के दिग्गज नेता, एनसीपी के प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद उनके एक करीबी ने बड़ा खुलासा किया है। इस खुलासे ने सिर्फ राजनीतिक गलियारों में सिर्फ हलचल नहीं मचाई, बल्कि शरद पवार और अजित पवार के रिश्तों पर नई बहस छेड़ दी है। पवार के सहयोगी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि एनसीपी के दोनों गुटों के बीच सुलह की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई थी और कुछ दिनों में विलय की आधिकारिक घोषणा भी होने वाली थी। ये पल महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा अहम साबित हो सकता था, मगर नियति को कुछ और ही मंज़ूर था।
अजित पवार के असामयिक निधन ने इस पूरी योजना पर पानी फेर दिया है। जानकारी के मुताबिक, चाचा शरद पवार और भतीजे अजित पवार के बीच कड़वाहट हाल के दिनों में काफी हद तक कम हो गई थी। दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेता काफी समय से संपर्क में थे और जिला परिषद चुनाव के नतीजों के बाद विलय की तैयारी कर चुके थे। खबरों की मानें तो, इसे लेकर हाल ही के हफ्तों में कई बैठकें हुई थी। बताया जा रहा है कि 16 जनवरी को एक नेता के आवास पर और 17 जनवरी को खुद शरद पवार के घर पर अहम चर्चाएं हुई थी। विलय का मुख्य उद्देश्य परिवार को एकजुट करना और कार्यकर्ताओं की मांग को पूरा करना था। पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ स्थानीय चुनावों में दोनों गुटों का साथ आना इस बदलाव की पहली सीढ़ी था।
अजित पवार महसूस कर रहे थे कि पार्टी से अलग होकर राजनीति करने में जो तनाव है, उसे खत्म करना ही पार्टी के भविष्य के लिए बेहतर होगा। हालांकि अजित दादा के अचानक चले जाने से एनसीपी (अजित गुट) तो अनाथ हो ही गई है, इसके अलावा महायुति गठबंधन के समीकरण भी बदल गए हैं। अब सबकी नज़रें इस पर टिकी हैं कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार कमान संभालती हैं या फिर खुद शरद पवार पूरे परिवार को एक साथ वापस लाते हैं अथवा कुछ और ही नज़ारा देखने को मिलेगा। यदि दोनों गुटों का विलय होता है तो नेतृत्व को यह भी तय करना होगा कि वो महायुति में बने रहें या विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी का दामन थाम लें।