नेपाल चुनाव : RSP का शानदार प्रदर्शन, अब तक 124 सीटें जीतकर बनाई मजबूत बढ़त

Highlights RSP ने 124 सीटें जीतकर बहुमत की ओर बढ़त बनाई, नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव। बालेंद्र शाह ने झापा-5 से पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली को 49,614 वोटों से हराकर सबको चौंकाया। युवाओं के समर्थन और भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को मजबूत बनाया।

नेपाल की राजनीति में इस समय एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए चुनाव के नतीजों ने सबको चौंका कर रख दिया है। नेपाल के पूर्व उप-प्रधानमंत्री रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए भारी बहुमत की ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं। ताज़ा जानकारी के मुताबिक, इस पार्टी ने अब तक 124 सीटों पर जीत हासिल कर ली है, जो नेपाल के चुनावी इतिहास में एक बहुत बड़ी बात मानी जा रही है। जिस तरह से रुझान सामने आ रहे हैं, उससे ऐसा लगता है कि यह पार्टी दो-तिहाई बहुमत के बहुत नज़दीक पहुंच जाएगी। अगर ऐसा होता है, तो नेपाल में दशकों से राजनीति में प्रभाव रखने वाली पुरानी पार्टियां जैसे नेपाली कांग्रेस और CPN-UML पूरी तरह से कमजोर पड़ सकती हैं। नेपाल की 275 सीटों में सामान्य बहुमत 138 सीटों का है, जो इस समय काफी आसानी से मिलता हुआ दिखाई दे रहा है।

इस बड़ी जीत के पीछे सबसे बड़ा नाम बालेंद्र शाह (बालेन) का है। बालेन शाह, जो पहले काठमांडू के मेयर रहे हैं और एक मशहूर रैपर भी रह चुके हैं, अब नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। उन्होंने खुद झापा-5 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली को भारी मतों से हराकर सबको हैरान कर दिया है। बालेन शाह ने ओली को 49,614 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। बालेन शाह की लोकप्रियता और युवाओं के बीच उनके क्रेज ने RSP को इस ऊंचाई तक पहुंचाया है। RSP के अन्य उल्लेखनीय उम्मीदवारों की बात करें तो पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने भी चितवन-2 सीट से जीत चुके हैं। उन्होंने मीना कुमारी खरेल को 39,838 वोटों से हराया है। उनके अलावा निशा डाँगी झापा-1 से 35,130 वोटों से और सोबिता गौतम चितवन-3 सीट से 38,662 वोटों से जीत चुकी हैं।

नेपाल की जनता, खासकर युवा वर्ग, पुरानी पार्टियों के भ्रष्टाचार से काफी परेशान था। इसके अलावा देश में राजनीतिक अस्थिरता भी एक बड़ा मुद्दा रहा है। नेपाल के संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य बनने के बाद से अब तक 13 से 14 बार प्रधानमंत्री बदल चुके हैं और कोई भी सरकार अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी है। बार-बार होने वाले ये बदलाव काफी हद तक राजनीतिक नेताओं के बीच तीव्र सत्ता संघर्ष और एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ के कारण भी होते रहे हैं। स्थानीय लोग इससे निजात पाना चाहते थे और उन्होंने इसके लिए RSP को एक योग्य विकल्प के रूप में चुना। पार्टी ने अपने चुनावी वादों में सुशासन और रोजगार जैसे अहम मुद्दों पर जोर दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या बालेन शाह और उनकी टीम जनता की इन उम्मीदों पर खरी उतर पाती है।

हालांकि बालेन शाह का भारत के प्रति क्या रूख होता है, यह भी ध्यान देने वाली बात होगी। यदि अतीत की कुछ घटनाओं की बात करें तो उन्होंने जून 2023 में काठमांडू में सभी भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने का कदम उठाया था, जब भारतीय फिल्म आदिपुरुष में एक डायलॉग शामिल किया गया था जिसमें कहा गया था कि “सीता भारत की बेटी हैं।” इस डायलॉग ने नेपाल में विवाद खड़ा कर दिया, जहां सीता का जन्म पारंपरिक रूप से जनकपुर में माना जाता है। इस प्रतिबंध को स्थानीय अदालत में चुनौती दी गई, जिसने शाह को प्रतिबंध हटाने का आदेश दिया। शाह ने पहले इनकार कर दिया, लेकिन बाद में प्रतिबंध हटाने के लिए मजबूर हो गए। बाद में उन्होंने एक बार फिर सोशल मीडिया पर तत्कालीन सरकार और न्यायपालिका को “भारतीय गुलाम” तक कह दिया। इसके अलावा 2023 में ही उन्होंने “ग्रेटर नेपाल” का नक्शा अपने ऑफिस में लगाया था, जिसमें वर्तमान भारत के भी कुछ हिस्से शामिल बताए गए थे। इस पर भारत की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज की गई थी।

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