गरियाबंद में 45 लाख के 9 इनामी नक्सलियों ने किया सरेंडर, कई हथियार भी हुए बरामद

Highlights गरियाबंद जिले में 9 आतंकियों ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया, इनमें 6 महिलाएं भी शामिल थी। इनमें अंजू और बलदेव जैसे बड़े नाम शामिल है, जिन पर 8-8 लाख रूपए का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वाले नक्सली अपने साथ 3 एके-47 राइफल, 2 एसएलआर और एक .303 राइफल भी लेकर आए थे।

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों को जबरदस्त कामयाबी मिली है। ओडिशा सीमा पर सक्रिय 9 खूंखार नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया और पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। इन नक्सलियों की दहशत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन सभी पर कुल मिलाकर 45 लाख रूपए का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में 6 महिलाएं भी शामिल हैं, जो लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थीं।

इस पूरी घटना की सबसे खास बात यह रही कि इन नक्सलियों ने अपने परिवार वालों की भावुक अपील के बाद आत्मसमर्पण किया। हाल ही में पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारी गांवों में जाकर लोगों से मिल रहे थे और उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। घरवालों की समझाइश और सरकार की 'पुनर्वास नीति' से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने बंदूक छोड़ने का मन बना लिया।

सरेंडर करने वाले नक्सली अपने साथ 3 एके-47 राइफल, 2 एसएलआर और एक .303 राइफल भी लेकर आए थे, जिन्हें उन्होंने स्थानीय आईजी के सामने जमा कर दिया। इनमें 'अंजू' और 'बलदेव' जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जिन पर 8-8 लाख रुपये का भारी इनाम था। ये लोग कई सालों से पुलिस की हिट लिस्ट में थे और कई बड़ी वारदातों में शामिल रहे थे। आईजी के मुताबिक, इस सरेंडर के साथ अब गरियाबंद जिले में कोई सक्रिय माओवादी नहीं बचा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गरियाबंद और आसपास के इलाकों के लिए एक बड़ी राहत है। सरेंडर करने के बाद अब इन पूर्व नक्सलियों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिलेगा ताकि वे एक सामान्य जीवन जी सकें। पुलिस ने अन्य नक्सलियों से भी अपील की है कि वे भी हिंसा का रास्ता छोड़कर वापस अपने घरों को लौट आएं। आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2025 में ही 300 से अधिक माओवादी मारे गए, 800 से अधिक गिरफ्तार हुए और करीब 2000 माओवादियों ने सरेंडर कर दिया। फिलहाल केंद्र सरकार के अनुसार, देश में केवल तीन जिले रेड टेरर से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं, जबकि 8 अन्य जिले माओवादी प्रभावित हैं। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक माओवाद को खत्म करने की घोषणा की है।

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