मकर संक्रांति पर संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब, 80 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

Highlights आज दोपहर तक करीब 80 लाख श्रद्धालु संगम में पवित्र डुबकी लगा चुके है। प्रशासन का अनुमान है कि ये आंकड़ा 1.5 से 2 करोड़ तक पहुंच सकता है। उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता यही होगी की आगे भी सभी श्रद्धालु बिना परेशानी संगम में डुबकी लगा सकें।

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के पहले बड़े स्नान पर्व "मकर संक्रांति" पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे को चीरते हुए देश के विभिन्न कोनों से आए हुए श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर आस्था की डुबकी लगाई। सुबह तक 30 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान कर लिया था। दोपहर तक ये आंकड़ा 80 लाख तक पहुंच चुका था। प्रशासन को अनुमान है कि आज 1.5 से 2 करोड़ लोग संगम में डुबकी लगाएंगे। स्नान की प्रमुख तिथि 14 जनवरी ही थी, मगर इसकी शुभ अवधि आज 15 जनवरी को भी जारी है। 

सुबह से ही मेला क्षेत्र में रौनक शुरू हो गई थी। घाटों पर "हर हर गंगे" और "जय माँ गंगे" के जयकारे गूंजते रहे। सूर्य के उत्तरायण होने के इस पर्व पर श्रद्धालुओं ने स्नान तो किया ही, इसके अलावा पूजा-पाठ, अर्चना और दान-पुण्य भी किया। इतनी अधिक भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की है। पूरे मेला क्षेत्र को 7/8 सेक्टरों में बांटा गया है। सुरक्षा के लिए 5,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। स्नान घाटों के किनारे महिलाओं के लिए 1,200 से अधिक चेंजिंग रूम का निर्माण किया गया है। यातायात सुचारू रूप से चलता रहे इसके लिए विशेष रूट्स निर्धारित किए गए हैं, ताकि किसी तरह की असुविधा न हो।

कुछ परंपराओं में मकर संक्रांति को माघ मेले के भीतर मुख्य कल्पवास काल की शुरुआत के रूप में माना जाता है। इस दौरान कल्पवासी कहलाने वाले भक्त तंबुओं में रहकर सात्विक जीवन जीते हैं और कठिन साधना करते हैं। मकर संक्रांति के अलावा मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पौर्णिमा और महशिवरात्रि भी अन्य प्रमुख स्नान तिथियां है। प्रयाग में अब तक स्नान कर चुके श्रद्धालुओं के अनुभव भी सकारात्मक ही रहे है। कई श्रद्धालुओं ने स्थानीय अधिकारियों से बातचीत में बताया कि उन्हें मेले में अच्छी और सुचारु व्यवस्थाएं मिलीं, जिससे उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई और वे आसानी से स्नान कर पाए। प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता यही होगी कि आगे भी सभी श्रद्धालु बिना किसी परेशानी पवित्र संगम में डुबकी लगा सकें।

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