ऑनलाइन गेमिंग मामले में कांग्रेस नेता के. सी. वीरेंद्र के घर ED की छापेमारी

Highlights कांग्रेस नेता के.सी. वीरेंद्र के 31 ठिकानों पर ED की छापेमारी। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तारी, बेंगलुरु कोर्ट में होगी पेशी। ऑनलाइन गेमिंग के जरिए लोग हो रहे ठगी का शिकार।

नई दिल्ली : ऑनलाइन गेमिंग बिल संसद में पास होने के सिर्फ एक दिन के पश्चात ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक कांग्रेस नेता के. सी. वीरेंद्र के घर से 12 करोड़ रुपये की नकदी भी बरामद कर ली गई है,  इतना ही नहीं नकदी के साथ साथ 6 करोड़ रुपये की ज्वेलरी भी ED ने जब्त कर ली. इतना ही नहीं ED ने चितदुर्गा जिले से कांग्रेस विधायक K. C. वीरेंद्र और अन्य लोगों के विरुद्ध ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी के केस भी दर्ज कर लिया गया था.

ED ने देशभर में 31 स्थानों  पर छापेमारी की, जिनमें गंगटोक, बेंगलुरु, हुबली, जोधपुर, चितदुर्गा जिला, मुंबई और गोवा शामिल हैं, ओशन रिवर्स कैसिनो, पप्पी’स कैसिनो प्राइड, गोवा में 5 कैसिनो- पप्पी’स कैसिनो गोल्ड, ओशन 7 कैसिनो और बिग डैडी कैसिनो-पर भी जांच की गई है.

इतना ही नहीं जांच में ये भी सामने आया है कि अपराधी कई ऑनलाइन सट्टेबाजी साइट्स का संचालन कर रहा था, जिनके नाम King567, Raja567 आदि हैं. इसके अलावा आरोपी का भाई के. सी. थिप्पेस्वामी दुबई से तीन कंपनियां- डायमंड सॉफ्टटेक, टीआरएस टेक्नोलॉजीज और प्राइम9 टेक्नोलॉजीज-चलाता है. ये कंपनियां कॉल सेंटर सेवाओं और गेमिंग बिजनेस से जुड़ी हुई हैं.

वर्तमान युग में तकनीकी प्रगति ने मनोरंजन के क्षेत्र में कई तरह के परिवर्तन कर दिए है, एवं ऑनलाइन गेमिंग इसका एक प्रमुख उदाहरण भी है। भारत में ऑनलाइन गेमिंग का बाजार तेजी से बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट्स की माने तो 2024 में भारतीय गेमिंग बाजार का आकार 31,938 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जिसमें रियल मनी गेमिंग (RMG) का योगदान 85.7% था। लगभग 45 करोड़ गेमर्स के साथ, भारत दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल गेमिंग बाजार गया है। यह उद्योग न केवल मनोरंजन का मजा देता है, बल्कि सामाजिक संपर्क, शैक्षिक मूल्य और आर्थिक रूप से बेहतर बनता है। हालांकि, इसके साथ ही ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड की घटनाएं भी हर बढ़ती रहती है, जो उपयोगकर्ताओं के लिए गंभीर जोखिम को भी जन्म देता है।

ऑनलाइन गेमिंग के लाभ जानिए : 

ऑनलाइन गेमिंग केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी बहुत ज्यादा अहम् है। पहला, यह सामाजिक संबंधों को बढ़ावा दे रहे है। गेमर्स दुनिया भर के खिलाड़ियों से जुड़ सकते हैं, जिससे वैश्विक मित्रता और समुदाय निर्माण को बढ़ावा मिलता है। मल्टीप्लेयर गेम्स में खिलाड़ी एक-दूसरे के साथ रणनीतियां बनाने पर ध्यान देते है, जिससे टीमवर्क और संचार कौशल विकसित होगा। दूसरा, कुछ गेम्स रणनीतिक सोच, समस्या-समाधान और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाते हैं, जो वास्तविक जीवन में भी बहुत अहम् है। तीसरा, गेमिंग उद्योग आर्थिक मौका प्रदान करता है। ई-स्पोर्ट्स, गेम डेवलपमेंट, और स्ट्रीमिंग जैसे इलाकों में रोजगार के मौका बढ़े हैं। 

ऑनलाइन गेमिंग से होने वाली हानि और लत का खतरा :

ऑनलाइन गेमिंग के लाभों के बाद भी, इसके नकारात्मक असर भी बेहद देखने के लिए मिलते हैं। सबसे बड़ी परेशानी है गेमिंग की बुरी आदत बच्चे और युवा आकर्षक ग्राफिक्स, रिवॉर्ड पॉइंट्स, और प्रतिस्पर्धी माहौल की वजह से घंटों गेमिंग में बिजी रहते है। इतना ही नहीं यह उनकी पढ़ाई, शारीरिक स्वास्थ्य, और सामाजिक जीवन को प्रभावित करने लगा है। लंबे वक़्त तक स्क्रीन के सामने रहने से आंखों में तनाव, मोटापा, एवं मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे चिंता और अवसाद और भी ज्यादा बढ़ सकता है।  इसके साथ साथ, अत्यधिक गेमिंग से सामाजिक अलगाव बढ़ता है, क्योंकि खिलाड़ी वास्तविक दुनिया के रिश्तों से दूर होने लग जाते है। कुछ केसों में, गेमिंग की लत की वजह से आत्महत्या जैसी गंभीर घटनाएं भी सामने आने लगी है।

गेमिंग फ्रॉड का बढ़ रहा डर : 

खबरों की माने तो गेमिंग के बढ़ते चलन के साथ साइबर अपराधी इसे ठगी का जरिया बना रहा है। भारत में लगभग 40 करोड़ गेमर्स आकर्षक ऑफर्स और आसान जीत के लालच में फसते जा रहे है। 

डेटा चोरी: कई गेमिंग ऐप्स डाउनलोड करने पर यूजर्स से नाम, मोबाइल नंबर, और बैंक खाते जैसी निजी जानकारी मांगते हैं। इनका दुरुपयोग कर ठग नए खाते खोल सकते हैं या मौजूदा खातों को हैक कर सकते हैं। मैलवेयर और वायरस: फर्जी लिंक्स के जरिए भेजे गए गेम्स डाउनलोड करने पर मालवेयर डिवाइस में प्रवेश कर सकता है, जिससे डेटा चोरी हो सकती है। साइबर बुलिंग और ब्लैकमेलिंग: कुछ स्कैमर बच्चों को नाबालिग बनकर दोस्ती करते हैं और उनकी निजी जानकारी चुराकर ब्लैकमेल करते हैं। फर्जी सट्टेबाजी ऐप्स: महादेव बेटिंग ऐप जैसे प्लेटफॉर्म्स यूजर्स को कम पैसे में ज्यादा जीत का लालच देकर फंसाते हैं। गेम की हार-जीत ठगों के नियंत्रण में होती है। हाल के वर्षों में, गृह मंत्रालय ने 174 सट्टेबाजी और जुए से संबंधित ऐप्स को ब्लॉक किया है, जिनमें PUBG और 1xBet जैसे नाम शामिल हैं।

बचाव के उपाय :

ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड से बचने के लिए कई तरह के उपाए अपनाएं जा सकते है:  केवल अधिकृत स्रोतों, जैसे गूगल प्ले स्टोर या ऐपल स्टोर, से ऐप्स डाउनलोड करें। निजी जानकारी, जैसे क्रेडिट कार्ड डिटेल्स, साझा करने से बचें। संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक न करें और डिवाइस में मजबूत एंटीवायरस इंस्टॉल करें। गेमिंग ऐप के पब्लिशर की विश्वसनीयता जांचें। माता-पिता बच्चों की गेमिंग गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें सीमित समय के लिए गेम खेलने की सलाह दें। साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

नियामक प्रयास :

भारत सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करने के लिए कदम उठाए हैं। 2025 में 'प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल' लोकसभा में पारित हुआ, जो ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देता है और रियल मनी गेम्स पर सख्ती करता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा गठित टास्क फोर्स ने केंद्रीय स्तर के कानून और नियामक निकाय की सिफारिश की है। यह कानून 'गेम ऑफ स्किल' और 'गेम ऑफ चांस' को अलग करता है, ताकि सट्टेबाजी और जुए को नियंत्रित किया जा सके।

ऑनलाइन गेमिंग एक शक्तिशाली जरिया है जो मनोरंजन, शिक्षा, और आर्थिक मौके प्रदान करता है, लेकिन इसके साथ जुड़े फ्रॉड और लत के खतरे इसे जोखिम भरा बना देते है। उपयोगकर्ताओं को जागरूकता, आत्म-नियंत्रण, और सुरक्षित प्रथाओं को अपनाने की जरुरत है। सरकार के नियामक प्रयास और व्यक्तिगत सावधानी मिलकर इस उद्योग को सुरक्षित और लाभकारी बना सकते हैं। संतुलित दृष्टिकोण के साथ, ऑनलाइन गेमिंग न केवल मनोरंजन का साधन बन जाएगा, बल्कि एक सकारात्मक सामाजिक और आर्थिक शक्ति भी साबित हो सकता है।

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