पटना पक्षी विहार और छारी-ढांड वेटलैंड हुए रामसर साइट्स में शामिल

Highlights पटना पक्षी विहार और छारी-ढांड वेटलैंड रामसर साइट्स में शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने इस उपलब्धि पर खुशी जताई। भारत में वेटलैंड्स की संख्या बढ़कर 98 हो चुकी है।

भारत को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक और अहम उपलब्धि मिली है। उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित पटना पक्षी विहार और गुजरात के कच्छ जिले के छारी-ढांड वेटलैंड अब अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट्स की सूची में शामिल कर लिए गए हैं। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "X" पर लिखा, "यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि एटा (उत्तर प्रदेश) में स्थित पटना पक्षी विहार और कच्छ (गुजरात) में स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थल का दर्जा प्राप्त हुआ है। वहां के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ वेटलैंड संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को हार्दिक बधाई। ये मान्यताएं बायोडाइवर्सिटी के संरक्षण और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम्स की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती हैं। आशा है कि ये वेटलैंड्स अनगिनत प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में फलती-फूलती रहेंगी।"

पटना पक्षी विहार एक छोटा लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण दलदली क्षेत्र है। इसकी स्थापना 1991 में हुई थी और हर साल यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। राज्य के सबसे छोटे पक्षी अभयारण्य के रूप में जाना जाने वाला पटना पक्षी विहार प्रवासी पक्षियों सहित 200 से अधिक पक्षी प्रजातियों का घर है। इसके रामसर साइट बनने के बाद उत्तर प्रदेश में रामसर साइट्स की संख्या बढ़कर 11 हो गई है, जो राज्य के लिए एक अहम उपलब्धि है। वहीं छारी-ढांड वेटलैंड गुजरात का एक प्रमुख संरक्षित वेटलैंड रिज़र्व है। मानसून के दौरान ये इलाका पानी से भर जाता है और यहां फ्लेमिंगो, सारस समेत कई दुर्लभ और प्रवासी पक्षी आते हैं। इनके अलावा इस क्षेत्र में चिंकारा और रेगिस्तानी बिल्ली जैसे जीव भी पाए जाते हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि रामसर कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य दुनियाभर के अहम वेटलैंड्स का संरक्षण करना है। किसी क्षेत्र को रामसर साइट का दर्जा मिलने से उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है और उसके संरक्षण के लिए बेहतर नीतियां और सहयोग संभव हो पाता है। भारत में पिछले एक दशक में रामसर साइट्स की संख्या में वृद्धि हुई है। 2014 में जहां देश में रामसर साइट्स की संख्या 26 थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 98 हो चुकी है।

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