मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति की पहल की है। हाल ही में उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बात की। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य इलाके में बिगड़ते हालातों पर काबू पाना और निर्दोष लोगों की जान बचाना था। प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से फोन पर बात करते हुए कहा कि किसी भी संघर्ष में आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने नेतन्याहू को हाल के घटनाक्रमों पर भारत की चिंताओं से अवगत कराया और इस बात पर जोर दिया कि हिंसा और लड़ाई का जल्द से जल्द अंत होना जरुरी है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर बातचीत की। उन्होंने UAE पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और इन हमलों में जान गंवाने वालों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की। उन्होंने साफ किया कि भारत इस कठिन समय में UAE के साथ एकजुटता से खड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने UAE के राष्ट्रपति को वहां रहने वाले भारतीय समुदाय की देखभाल करने के लिए धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि, "हम तनाव कम करने, क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करते हैं।"
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ईरान और इजराइल के बीच तनाव चरम पर है। हाल की कुछ बड़ी सैन्य घटनाओं और हमलों ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। मिडिल ईस्ट में लाखों भारतीय रहते हैं और वहां की अस्थिरता का असर सीधे तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत एक शांति दूत की भूमिका निभाते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम दिखाता है कि भारत वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार देश के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। भारत का लक्ष्य साफ है कि लड़ाई रुके, शांति बहाल हो और मासूम लोगों को युद्ध की आग में न झोंका जाए।