पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले एक बहुत ही अहम राज्य असम में 9 अप्रैल को चुनाव होने हैं। इसी सिलसिले में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज धेमाजी जिले के गोगामुख में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। रैली को संबोधित करने से पूर्व उन्होंने डिब्रूगढ़ में एक चाय के बागान का दौरा किया और वहां काम कर रही महिलाओं से बातचीत की। उन्होंने इसकी जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, "चाय असम की आत्मा है! यहाँ की चाय ने पूरी दुनिया में अपनी जगह बनाई है। आज सुबह डिब्रूगढ़ में, मैं एक चाय बागान में गया और वहाँ काम करने वाली महिलाओं से बातचीत की। यह एक बहुत ही यादगार अनुभव था। हमें चाय बागान से जुड़े हर एक परिवार के प्रयासों पर बहुत गर्व है। उनकी कड़ी मेहनत और लगन ने असम का गौरव बढ़ाया है।"
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पहल सर्बानंद सोनोवाल और फिर हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में, असम ने पिछले 10 वर्षों में सेवा और सुशासन के एक नए युग का अनुभव किया है। ये असम चुनाव एक विकसित भारत के लिए एक विकसित असम के निर्माण के चुनाव हैं। इस बार, भाजपा-NDA सरकार जीत की हैट्रिक पूरी करने जा रही है। कांग्रेस भी हार की हैट्रिक का सामना करने के लिए तैयार है। कांग्रेस का 'स्वघोषित राजकुमार' तो हार का शतक लगाने जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा-असम ने कल एक घोषणापत्र जारी किया। कल मंगलवार था और मंगलवार को जारी यह घोषणापत्र असम में और अधिक मंगल यानी शुभता लाने वाला है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारी बेटियों के साथ कोई छल न हो, उनके जीवन की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कई बड़ी घोषणाएं भी की गई हैं। असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करना, हमारे जनजातीय समाज की परंपराओं की रक्षा करना और असम की पहचान को बचाना, ये बहुत बड़ी घोषणाएं हैं। भाजपा जो कहती है, वह करती है।"
उन्होंने आगे बताया कि पिछले एक दशक में, असम ने विकास का एक लंबा सफर तय किया है। ये 20-25 साल के युवा भाजपा-NDA के सुशासन के गवाह रहे हैं। इन्होंने कांग्रेस शासन का वह काला दौर नहीं देखा, जब असम से आने वाली खबरों में सिर्फ बम, बंदूकें, दंगे और कर्फ्यू ही होते थे। डबल-इंजन सरकार ने असम को स्थायी शांति का एक नया रास्ता दिखाया है। पिछले एक दशक में, असम के हजारों बेटे-बेटियों ने बंदूकें छोड़ दी हैं और एक नए भविष्य से जुड़ गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी असम के औद्योगिक विकास का जिक्र करते हुए कहा, "एक समय था जब असम की चर्चा दुनिया भर में उसकी चाय के लिए होती थी। अब, असम को दुनिया न केवल चाय के लिए, बल्कि चिप के लिए भी पहचानेगी। वह दिन दूर नहीं जब असम के सेमीकंडक्टर प्लांट से चिप का उत्पादन शुरू हो जाएगा। इससे असम आधुनिक तकनीक के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होगा। आने वाले समय में, चाहे फोन हों, कारें, टीवी या फ्रिज, ये सभी उत्पाद असम में बनी चिप्स पर ही चलेंगे। एक विकसित असम के लिए यही हमारा रोडमैप है।"
इंफ्रास्ट्रचर में हुए सकारात्मक बदलाव पर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा कि असम को प्रकृति ने बहुत कुछ दिया है, असम में संसाधनों की कभी कोई कमी नहीं रही। लेकिन सत्ता की खातिर, कांग्रेस ने असम के समाज को बांट दिया और ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों को कभी आपस में जुड़ने नहीं दिया। 60-65 सालों में, कांग्रेस ने ब्रह्मपुत्र पर सिर्फ 3 पुल बनाए। पुलों की कमी के कारण, हमने बहुत से लोगों को खो दिया। डबल-इंजन सरकार ने इस समस्या को समझा और सिर्फ 10-11 सालों में ब्रह्मपुत्र पर 5 बड़े पुलों का निर्माण पूरा किया।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर भी हमला किया। उन्होंने कहा, "असम कांग्रेस के नेता एक खतरनाक कानून बनाने की बात कर रहे हैं। आज, मैं असम की जनता के सामने कांग्रेस की एक चाल का पर्दाफाश करना चाहता हूँ। 2014 के चुनावों से पहले, कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने एक कम्युनल वायलेंस कानून बनाने की कोशिश की थी। इसका मकसद अपने तय वोट बैंक को खुश करना था। इस बिल में, दंगों के लिए बहुसंख्यक समुदाय को जिम्मेदार ठहराया गया था और धार्मिक अल्पसंख्यकों को पीड़ित माना गया था। यह बिल अपने आप में ही सांप्रदायिक था, इसलिए भाजपा-NDA ने इस कानून को संसद में पास नहीं होने दिया। अब, 12 साल बाद, कांग्रेस यहाँ असम में भी, इसी तरह का एक कानून बनाने की घोषणा कर रही है। कांग्रेस के नेता खुद ही खुलेआम ये घोषणाएँ कर रहे हैं। यह बिल्कुल साफ है कि सत्ता पाने के लिए कांग्रेस कुछ भी कर सकती है।"