प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन, महिलाओं के अधिकार का जिसने विरोध किया, महिलाओं ने उसे माफ नहीं किया

Highlights प्रधानमंत्री मोदी ने कहा की समय की मांग है की देश की आधी आबादी पॉलिसी-मेकिंग का हिस्सा बने। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा की जो लोग आज इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा की इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोई जरूरत नहीं है।

भारत में 16 से 19 अप्रैल तक तीन दिन के विशेष संसदीय सत्र की शुरुआत हो चुकी है। आज केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में संविधान (131वां) संशोधन बिल, 2026 और परिसीमन बिल, 2026 पेश कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी आज केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 को लोकसभा में पेश किया है। 

इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण और परिसीमन पर आज सदन को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "इस महत्वपूर्ण बिल पर आज सुबह चर्चा शुरू हुई। कई सदस्यों ने विभिन्न मुद्दे उठाए हैं और हम सदन को उन मामलों पर विस्तृत और सटीक जानकारी प्रदान करेंगे। किसी देश के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं। ऐसे समय में, समाज की मानसिकता और नेतृत्व की क्षमता उस पल को भुनाकर राष्ट्र के लिए एक संपत्ति में तब्दील कर देती है, जिससे एक मजबूत विरासत का निर्माण होता है। भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में, ये ऐसे ही पल हैं।"

प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, महिला आरक्षण की पहल को तभी लागू कर दिया जाना चाहिए था, जब 25-30 साल पहले पहली बार इसका प्रस्ताव रखा गया था। उन्होंने कहा कि, "आज हम इसे परिपक्व अवस्था में ले आए हैं। आवश्यकता के अनुसार, इसमें समय-समय पर सुधार भी किया जाता है और यही लोकतंत्र की सुंदरता है। हमारा देश लोकतंत्र की जननी है। हमारा लोकतंत्र हजारों वर्षों से विकास की यात्रा पर है और हम सभी को इस सदन में इस विकास यात्रा में एक नया आयाम जोड़ने का मौका मिला है।"

उन्होंने आगे कहा कि "हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हमें देश की आधी आबादी से जुड़ी राष्ट्र-निर्माण की इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिला है। हम सांसदों को यह महत्वपूर्ण अवसर हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। हम भारतीय मिलकर देश को एक नई दिशा देने जा रहे हैं। हम अपनी शासन व्यवस्था में संवेदनशीलता लाने के लिए एक सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं। यह न केवल देश की राजनीति को आकार देगा, बल्कि यह देश की दिशा और दशा भी तय करेगा।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, "21वीं सदी में भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। आज हम सभी दुनिया में भारत की स्वीकार्यता को महसूस करते है और ये हम सभी के लिए गर्व का क्षण है। मेरा मानना है कि विकसित भारत का मतलब केवल सड़कें, इंफ्रास्ट्रक्चर या आर्थिक प्रगति के आंकड़े ही नहीं हैं। हम विकसित भारत को लेकर सीमित सोच रखने वाले लोग नहीं हैं। हम एक ऐसा विकसित भारत चाहते हैं, जहां पॉलिसी-मेकिंग में सबका साथ, सबका विकास का मंत्र सही मायनों में साकार हो। समय की मांग है कि देश की आधी आबादी पॉलिसी-मेकिंग का हिस्सा बने।

अपने संबोधन में उन्होंने इसका विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा, "मैं उन लोगों को भी एक सलाह देना चाहूँगा जो केवल राजनीतिक नजरिए से सोचते हैं। जब से हमारे देश में महिलाओं के लिए आरक्षण पर चर्चा शुरू हुई है और उसके बाद हुए हर चुनाव में, जिसने भी महिलाओं के इस अधिकार का विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया है।" प्रधानमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग आज विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि, "यह देश के लोकतंत्र के पक्ष में होगा, यह देश की सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया के पक्ष में होगा और इसका श्रेय हम सभी को मिलेगा। न तो ट्रेजरी डिपार्टमेंट और न ही मोदी इसके अकेले हकदार होंगे और न ही यहाँ बैठे सभी लोग इसके अकेले हकदार होंगे। मैं चाहूँगा कि जो लोग इसमें राजनीति की गंध सूंघ रहे हैं, वे पिछले 30 सालों में अपने नजरिए की जाँच करें और देखें कि क्या इसमें कोई फायदा है। मेरा मानना ​​है कि इसे राजनीतिक रंग देने की कोई जरूरत नहीं है। हमारी नीयत की खोट, देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी। मैं आज आपके पास यह अपील करने आया हूँ कि इसे राजनीति के तराजू पर न तौलें। आज पूरा देश, खासकर नारी शक्ति, हमारे फैसलों को जरूर देखेगी लेकिन फैसलों से ज्यादा, वे हमारे इरादों को देखेंगी।"

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