बांके बिहारी मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बन सकती है कमेटी

Highlights सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि 15 मई का आदेश वापस लिया जा सकता है। कमेटी में जिलाधिकारी और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की सहायता शामिल होगी। कोर्ट ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उचित सुविधाओं के विकास पर जोर दिया।

नई दिल्ली : वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन एवं उसके आस-पास के इलाके के विकास पर निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का संकेत भी दे दिया है। सुनवाई मंगलवार यानी कि 5 अगस्त 2025 की सुबह 10:30 तक के लिए स्थगित की जा चुकी है। इतना ही नहीं मंदिर मैनेजमेंट कमेटी ने मंदिर के प्रबंधन को लेकर स्टेट गवर्नमेंट के अध्यादेश का विरोध करते हुए याचिका भी दर्ज की है। कमेटी ने 15 मई को आए सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का भी विरोध किया है जिसमें राज्य की सरकार को बांके बिहारी कॉरिडोर बनाने के लिए मंदिर के फंड के उपयोग करने की मंजूरी दी थी।

मंदिर में धार्मिक गतिविधियों एवं प्रबंधन को लेकर विवाद : 

खबरों का कहना है कि याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने इस बारें में कहा है कि बांके बिहारी मंदिर एक निजी मंदिर है। उसमें धार्मिक गतिविधियों और मैनेजमेंट को लेकर 2 गुटों में विवाद शुरू हुआ है। राज्य सरकार ने बिना अधिकार में दखल दे रहे है। अब वह इस केस को सुप्रीम कोर्ट लेकर आ गई एवं कॉरिडोर के लिए मंदिर के फंड के उपयोग का आदेश भी दिया है। इसके पश्चात जल्दी-जल्दी एक अध्यादेश भी जारी किए है। इसका परिणाम ये हुआ कि मंदिर की स्थापना करने वाले और सदियों से उसे संभाल रहे गोस्वामी प्रबंधन से बाहर हो चुके है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर कमेटी से क्या कहा ? :

खबरों का कहना है कि शुरू में जस्टिस सूर्यकांत एवं जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने मंदिर कमेटी से कई तरह के सवाल करना शुरू कर दिए है। कोर्ट ने  इस बारें में कहा है, 'मंदिर निजी हो सकता है, लेकिन देवता हर किसी के है। वहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है। मंदिर का फंड श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े विकास में इसका उपयोग क्यों नहीं हो सकता? आखिर आप ऐसा क्यों चाहते है कि  सारा पैसा आपकी जेब में जाए?' सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बोला है कि याचिकाकर्ता को स्टेट गवर्नमेंट के कानून को हाई कोर्ट में चुनौती भी दे दी है।

15 मई के आदेश पर SC ने कही ये बात? :  

इतना ही नहीं इस पर कुरर के सख्त सवालों में दीवान ने कहा है कि 'असल बात यह है कि हमें सुने बिना ऐसा आदेश सुप्रीम कोर्ट से कैसे आ गया? केस कुछ और था, उसमें अचानक आदेश आ गया कि मंदिर का फंड कॉरिडोर बनाने के लिए लिया जाना चाहिए।' इस पर सहमति व्यक्त करते हुए कहा है कि किसी स्थान का विकास सरकार की जिम्मेदारी भी है। यदि उसे भूमि अधिग्रहण करना या तो वह ऐसा अपने पैसों से कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश को ले सकता है वापस ? :

खबरों की माने तो 50 मिनट चली इस सुनवाई के पश्चात जजों ने इस बात का भी संकेत दिया कि 15 मई के आदेश को कोर्ट वापस भी ले सकता है। फिलहाल मंदिर के प्रबंधन के लिए रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जा सकती है। इसमें जिलाधिकारी को भी रखा जाने वाला है। इलाके में ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की भी उसके आस-पास के विकास में सहायता की जाएगी। कोर्ट ने इस बारें में कहा है कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना बहुत ही जरुरी है। इसके लिए उचित सुविधाओं का विकास आवश्यक है।

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