पश्चिम बंगाल चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी-हुमायूं कबीर के गठबंधन से बढ़ सकती है सीएम ममता बनर्जी की मुश्किलें

Highlights AIMIM और AJUP के गठबंधन से बंगाल की राजनीति में नया तीसरा मोर्चा तैयार। मुस्लिम वोट बैंक में सेंध से TMC की मुश्किलें बढ़ने की संभावना। भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी के खिलाफ मुकाबला बना बेहद दिलचस्प।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। लोक सभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के साथ हाथ मिला लिया है। इस गठबंधन के ऐलान के साथ ही बंगाल की सियासी सरगर्मी काफी बढ़ गई है, क्योंकि इसका सीधा असर राज्य के मुस्लिम वोट बैंक पर पड़ सकता है। ओवैसी ने खुद इस गठबंधन की पुष्टि की है। 

उन्होंने कहा, "हमारी कोशिश है कि AIMIM को मजबूत किया जाए, हमारी आवाज को मजबूत किया जाए। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार हैं, जहां 30% मुसलमानों की आबादी है, वहां लगभग 5 लाख पिछड़े वर्ग के प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया गया जिसमें मुसलमान भी शामिल हैं। ये लोग सेक्यूलरिज्म के नाम पर वोट हासिल करते हैं, लेकिन जहां AIMIM हिस्सेदारी की बात करती है तो इन्हें तकलीफ होती है।"

हुमायूं कबीर की पार्टी ने कुल 182 सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य रखा है। ओवैसी की पार्टी लगभग 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ उनके गढ़ भवानीपुर से भी अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है, जो इस चुनाव की सबसे हॉट सीट हो सकती है। इस सीट से AJUP की ओर से पूनम बेगम, मुख्यमंत्री बनर्जी और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरेंगी। हुमायूं कबीर खुद भी रेजिनगर और नाओडा सीट से चुनाव लड़ने वाले हैं। 

पिछले कई चुनावों से बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक बड़े पैमाने पर TMC के साथ रहा है। लेकिन अब हुमायूं कबीर और ओवैसी के साथ आने से मुख्यमंत्री बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह गठबंधन खासतौर पर मुस्लिम बहुल इलाकों में TMC के वोटों को बांट सकता है। अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिल सकता है, जो बंगाल में अपनी सरकार बनाने की पूरी कोशिश कर रही है। 25 मार्च को ओवैसी और हुमायूं कबीर एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करने वाले हैं। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में, 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है और नतीजे 4 मई को आएंगे। अब देखना यह है कि बंगाल की जनता इस नए तीसरे मोर्चे को कितना पसंद करती है।

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