मुंबई की सुरक्षा की कहानी : भय के दौर से ज़ीरो टॉलरेंस तक का सफर

Highlights 26/11, 2006 ट्रेन धमाके जैसी घटनाओं ने मुंबईवासियों के मन में असुरक्षा की भावना उत्पन्न कर दी थी। 2014 के बाद मुंबई की आंतरिक सुरक्षा भी बेहतर हुई और बाहरी खतरों का भी बेहतर तरीके से सामना किया गया। मुंबई के उज्जवल भविष्य के लिए उसकी सुरक्षा और लॉ एंड ऑर्डर सबसे पहली प्राथमिकता है।

भारत की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई कभी रूकती नहीं है। हालांकि हमेशा आगे बढ़ते रहने वाले इस शहर ने अतीत में कुछ ऐसी घटनाएं, धमाके और खून-खराबा देखा है, जिनके कारण इसकी गति कुछ धीमी भी पड़ गयी थी। लेकिन जब से भाजपा ने महाराष्ट्र राज्य की बागडोर संभाली है, तब से उसने आतंकवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस और राष्ट्र प्रथम की भावना से ही काम किया है। इससे राज्य का लॉ एंड ऑर्डर, साथ ही मुंबई की सुरक्षा भी पहले से बेहतर हो चुकी है। 

2014 के पहले मुंबई डर और दहशत के माहौल में जी रही थी। 26/11 का हमला, 2011 में बम धमाका और 2006 ट्रेन धमाके जैसी कई घटनाओं ने मुंबईवासियों के मन में असुरक्षा की भावना उत्पन्न कर दी थी। साथ ही ये शहर हमेशा कट्टरपंथियों के निशाने पर बना रहता था। जब कोई आम मुंबईकर घर से निकलता था तो सोचता था कि शाम को वो अपने घर लौट पाएगा या नहीं। ये डर केवल एक शहर तक ही सीमित नहीं था। करीब एक दशक हर भारतीय इसी भय के माहौल में जी रहा था। बार-बार हो रहे विस्फोटों और प्रभावी सुरक्षा न होने या ज़िम्मेदार लोगों के समय पर ज़रूरी कदम न उठाने के कारण मुंबई की सुरक्षा ईश्वर भरोसे ही थी।

हालांकि 2014 में केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर सत्ता परिवर्तन हुआ और सुरक्षा को पहली प्राथमिकता दी गई। इंटेलिजंस पहले से ज़्यादा सक्रिय हुआ, सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार हुआ और तटीय सुरक्षा भी बेहतर हुई। सीधा संदेश दिया गया कि कानून तोड़ने वालों पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। सरकार का ध्यान सिर्फ बाहरी खतरों पर नहीं बल्कि आतंरिक सुरक्षा पर भी रहा। अतिक्रमण, घुसपैठ और उनसे जुड़े अपराधों पर सख्त कार्रवाई की गई। प्रशासन ने साफ़ किया की किसी भी हालत में लॉ एंड आर्डर से समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही जहां पर दंगा-तनाव जैसी स्थिति बनी, वहां पर भी जवाबी कार्रवाई की गई।

आज की मुंबई पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित है और स्थानीय लोग अपने आप को पहले से बेहतर मानते है। यहां कई कार्यक्रम और आयोजन शांति से पूरे होते हैं। ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा कि लोग किस नेतृत्व को चुनते है और किस दिशा में आगे बढ़ते है। लेकिन इतना साफ़ है कि मुंबई के उज्जवल भविष्य के लिए उसकी सुरक्षा और लॉ एंड ऑर्डर सबसे ज़रूरी और सबसे पहली प्राथमिकता है।

Related News