पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान जारी है। दोपहर 3 बजे तक 78.68% मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया है। हालांकि पिछले फेज की तुलना में इस बार कुछ अधिक हिंसा-तनाव और हंगामे की खबरें सामने आ रही हैं। कहीं-कहीं पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन्स (EVMs) में खराबी, तो कहीं पर डमी EVM की न्यूज भी सामने आई है। नोआपाड़ा विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) उम्मीदवार अर्जुन सिंह ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "हमें सूचना मिली थी कि नोआपाड़ा विधानसभा के मायापल्ली में बूथ संख्या 82-83 के बाहर एक डमी EVM रखी गई थी और मतदाताओं को बताया गया था कि कौन सा बटन दबाना है।" खानकुल विधानसभा सीट के रामचंद्रपुर आदर्श विद्याभवन स्थित बूथ संख्या 147-148 पर BJP और TMC के पोलिंग एजेंटों के बीच झड़प हो गई। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है, जिसमें फलता विधानसभा सीट के एक मतदान केंद्र पर, EVM में BJP वाले बटन को टेप से ब्लॉक्ड पाया गया। इस सीट पर TMC से जहांगीर खान प्रत्याशी हैं, वहीं BJP ने देबांगशु पांडा को अपने प्रत्याशी के तौर पर उतारा है।
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) ने कहा कि अगर EVM बटन पर टेप लगाने की बात सही पाई गई, तो बूथों पर दोबारा मतदान होगा। इसके अतिरिक्त पानीहाटी में, एक मतदान केंद्र पर, पर BJP के चुनाव चिह्न वाले बटन पर स्याही का एक धब्बा लगा हुआ था, जिससे वह ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। आपत्ति जताए जाने के बाद, सैनिटाइजर का इस्तेमाल करके स्याही को हटा दिया गया। पानीहाटी सीट से BJP उम्मीदवार और आरजी कर मेडिकल कॉलेज में रेप-हत्या की शिकार छात्रा की मां, रत्ना देबनाथ के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "TMC के गुंडे जिन्होंने मुझ पर हमला करने की कोशिश की, वे मुझे गालियां दे रहे थे। उन्होंने मेरे साथ बदतमीजी की और कहा कि वे 4 मई को मुझसे निपटेंगे। मैंने पुलिस से शिकायत की और उनकी गिरफ्तारी की मांग की, लेकिन पुलिस ने मुझे वहां से चले जाने को कहा। मैंने उनसे कहा कि वे मेरे मुख्य चुनाव एजेंट को मेरे साथ रहने दें, लेकिन उन्होंने इसकी इजाजत नहीं दी। जब मैंने पुलिस स्टेशन में शिकायत की, तो वो आए और वहाँ मौजूद TMC के सभी कार्यकर्ताओं को हटा दिया।" TMC के कार्यकर्ताओं द्वारा आज उन्हें खूब निशाना बनाया गया। रत्ना देबनाथ के खिलाफ "वापस जाओ" (Go Back) के नारे भी लगाए गए।