लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण बिल, समर्थन में 278 और विरोध में पड़े 211 वोट

Highlights गृह मंत्री अमित शाह ने कहा की विपक्ष को महिलाओं का आक्रोश हर स्तर, हर चुनाव और हर स्थान पर झेलना पड़ेगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का आरोप है की कांग्रेस ने पाप किया है और भारत की महिलाएं उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा की मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।

केंद्र सरकार के लिए 17 अप्रैल का दिन बड़ा ही निराशाजनक रहा। भारत की लोकसभा द्वारा संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 हराकर खारिज कर दिया गया। इस बिल के समर्थन में 278 और विरोध में 211 वोट पड़े। कल लोकसभा में 489 सांसदों ने वोट किया था। संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 का उद्देश्य लोकसभा की सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 (कहीं पर संख्या 816) करना था, ताकि मौजूदा सीटों को कम किए बिना महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जा सके। अब इस पूरे मुद्दे पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग रिएक्शंस भी सामने आ रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि विपक्षी पार्टियों को आगामी चुनावों में इसका नुकसान हो सकता है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने X पर लिखा, "नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया। महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है। अब देश की महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण, जो उनका अधिकार था, वह नहीं मिल पाएगा। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने यह पहली बार नहीं किया, बल्कि बार-बार किया है। उनकी यह सोच न महिलाओं के हित में है और न देश के। मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि नारी शक्ति के अपमान की यह बात यहाँ नहीं रुकेगी, दूर तक जाएगी। विपक्ष को ‘महिलाओं का आक्रोश’ न सिर्फ 2029 लोकसभा चुनाव में, बल्कि हर स्तर, हर चुनाव और हर स्थान पर झेलना पड़ेगा।"

वहीं केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का आरोप है कि कांग्रेस पार्टी ने पाप किया है और भारत की महिलाएं उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और TDP के मुखिया एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोशल मीडिया पर लिखा, "महिला आरक्षण विधेयक को रोककर, कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने भारत को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने से वंचित कर दिया है। यह केवल एक राजनीतिक बाधा नहीं है, बल्कि उन लाखों महिलाओं के साथ विश्वासघात है, जो संसद में समान आवाज और उचित प्रतिनिधित्व की हकदार हैं। राष्ट्र इसे याद रखेगा।" दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लिखा, "संसद में डिलिमिटेशन बिल फेल हुआ। मोदी जी के अहंकार की हार हुई। मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू।" वहीं TMC से राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने लिखा कि ये नरेंद्र और अमित के अंत की शुरुआत है।"

कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर ने भी मीडिया से बात करते हुए लिखा, "यह एक बहुत ही जबरदस्त जीत रही है। संवैधानिक संशोधन को पास करने के लिए BJP को जितने दो-तिहाई वोटों की ज़रूरत थी, उससे 52 वोट कम रह गए। हमें जीत का एक खास एहसास हो रहा है। यह वोट महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि परिसीमन और उस गड़बड़ी के खिलाफ है जो परिसीमन और संसद के अचानक विस्तार से हमारे लोकतंत्र को नुकसान पहुँचा सकती है, इसलिए हमने अपने लोकतंत्र को बचाने के लिए वोट दिया। हमने अपनी स्पीच में भी कहा है कि अगर आप महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से अलग कर देंगे, तो हम उसके पक्ष में वोट देंगे। उन्होंने इसे परिसीमन से अलग करने से मना कर दिया और इसी के खिलाफ हमने वोट दिया है।"

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