चलिए आपको बताते है क्या होता है भुत प्रेत का सच

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भूत-प्रेतों के बारे में तरह-तरह के किस्से-कहानियाँ (stories) सुनने जाती हैं, लेकिन उनकी वास्तविक प्रकर्ति की बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध (less information available) हुई है; क्योकि जिस तरह से भूत-प्रेत खुद को अभिव्यक्त करते है , वे तरीके अप्रत्याशित औऱ दूर्लभ है। ये सामन्यतः शोर,आवाज़े, सनसनाहट, गंध, वस्तुओं की उठा-पटक आदि के रूप में सामने आते है, जो कभी- अतिश्योक्तिपूर्ण, आलंकारिक और झूठ की गुंजाइश भी लिए होते है। इस बारे में हुए सर्वेक्षण (survey) ऐवं अध्ययन (research) बताते है लगभग हर 10 में से एक व्यक्ति के पास भूतों को महसूस (feel) करने की क्षमता है। जो लोग सप्रयास तथा सक्रीय रूप से इन्हे देखने की कोशिश करते है.

उन्हें इनमे सफलता मिलने कि कम से कम सँभावना होती है। बच्चों को इसका अनुभव व्यस्कों की तूलना (comparison) में ज्यादा होता है। उम्र बढ़ने के साथ व्यस्कों मे इनके विरूद्ध अवरोध की यांत्रिकता विकसित हों जाती है। इसी तरह पुरुषों की तुलना में महिलाओं (womens) को इनकि मौजूदगी क्या अनुभव ज्यादा होता है।

भूत का एक अर्थ होता है-जो बीत गया (past)। इसी तरह से भूत का संबंध भी अतीत कि गहराई (depth) से होता हैं। वही मृतात्मा भूत-प्रेत बनती है, जिसमें आसक्ति बहुत अधिक होती है ओर इसी काऱण वह अपने अतीत से जुडी होती है। भूत-प्रेत होते जरूर है, लेकिन इनसे डरने की जरूरत नहीं। ये हमारा कुछ बिगाड़ नहीं सकते; क्योंकि हम स्थूलशरीर में है और ये सूक्ष्मशरीर में। स्थूल व सूक्ष्मशरीर की सीमाएँ (limitations) व मर्यादाएँ है, जिन्हें ये तोड़ नहीं सकते। फिर भी कुछ घटनाएँ ऐसी घटती है, जो इनके अस्तित्व की पहचान करातीं हैं।

भूत-प्रेत दो तरह के होते है। पहले वे, जिनकी अकाल मृत्यु (sudden death) हो गई है और अपनी निर्धारित आयु पूरी होने तक वे भूत-प्रेत बनकर भटकते रहते है और दूसरी तरह के भूत वे होते है, जिनके बुरे कर्मों के कारण उन्हें भूत-प्रेत बनने की सजा मिलती है। सजा (punishment) भुगतने वाले भूत-प्रेतो की आयु कम से कम 1000 साल होती है। भूत-प्रेतों के अंतर्गत भी कई योनियाँ हैं, जैसे-प्रेत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी, ब्रह्मराक्षस इत्यादि.

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