Happy बर्थडे स्वर साम्राज्ञी ‘लता मंगेशकर’: पिता दीनानाथ नहीं चाहते थे, बेटी गायिका बने

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भारतरत्न से सम्मानित भारतीय पार्श्वगायन की अपरिहार्य और एकछत्र साम्राज्ञी स्वर-कोकिला लता मंगेशकर की गिनती आज उन अनमोल गायिकाओं में है. उनकी मधुर आवाज के दीवाने पूरी दुनिया में हैं. संगीत की मल्लिका कहलाने वाली लता मंगेशकर को कई उपाधियों से नवाजा जा चुका है. आज, यानी 28 सितंबर को उनके जन्म की 88वीं वर्षगांठ है. संगीत जगत की स्वर-कोकिला लता मंगेशकर का नाम सुनते ही हम सभी के कानों में मीठी-मधुर आवाज शहद-सी घुलने लगती है. आठ दशक से भी अधिक समय से हिन्दुस्तान की आवाज बनीं लता ने 30 से ज्यादा भाषाओं में हजारों फिल्मी और गैर-फिल्मी गानों में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा. लता ही एकमात्र ऐसी जीवित शख्सियत हैं, जिनके नाम पर पुरस्कार दिए जाते हैं. स्वर-कोकिला लता मंगेशकर जिनका जन्म 28 सितंबर, 1929 को एक मध्यमवर्गीय मराठा परिवार में हुआ. मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्मीं लता मंगेशकर पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बड़ी बेटी हैं. लता मंगेशकर का पहला नाम ‘हेमा’ था, मगर जन्म के पांच साल बाद माता-पिता ने इनका नाम ‘लता’ रख दिया था. लता मंगेशकर अपने सभी भाई-बहनों में बड़ी हैं. मीना, आशा, उषा तथा हृदयनाथ उनसे छोटे हैं. उनके पिता रंगमंच के कलाकार और गायक थे. लता मंगेशकर जो कि बचपन से ही गायक बनना चाहती थीं. बचपन में कुन्दन लाल सहगल की एक फ़िल्म चंडीदास देखकर उन्होने कहा था कि वो बड़ी होकर सहगल से शादी करेगी. पहली बार लता ने वसंग जोगलेकर द्वारा निर्देशित एक फ़िल्म कीर्ती हसाल के लिये गाया. उनके पिता नहीं चाहते थे कि लता मंगेशकर फ़िल्मों के लिये गाये इसलिये इस गाने को फ़िल्म से निकाल दिया गया. लेकिन उसकी प्रतिभा से वसंत जोगलेकर काफी प्रभावित हुए. पिता की मृत्यु के बाद (जब लता सिर्फ़ तेरह साल की थीं), लता को पैसों की बहुत किल्लत झेलनी पड़ी और काफी संघर्ष करना पड़ा. उन्हें अभिनय बहुत पसंद नहीं था लेकिन पिता की असामयिक मृत्यु की वज़ह से पैसों के लिये उन्हें कुछ हिन्दी और मराठी फ़िल्मों में काम करना पड़ा. लता मंगेशकर की परवरिश महाराष्ट्र में हुई. जब लता सात साल की थीं, तब वह महाराष्ट्र आईं. लता ने पांच साल की उम्र से पिता के साथ एक रंगमंच कलाकार के रूप में अभिनय शुरू कर दिया था. लता मंगेशकर जो कि हमेशा नंगे पाँव ही गाना गाती हैं.

विवाह के बंधन में क्यों नहीं बंधी लता?

बचपन में कुंदनलाल सहगल की एक फिल्म चंडीदास देखकर वह कहती थीं कि वह बड़ी होकर सहगल से शादी करेंगी. लेकिन उन्होंने शादी नहीं की. उनका कहना है कि घर के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी उन पर थी, ऐसे में जब शादी का ख्याल आता भी तो वह उस पर अमल नहीं कर सकती थीं.
लता ने अपने करियर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं. उनकी कोयल सी मधुर आवाज ने सैकड़ों फिल्मों के गीतों को अमर बनाया है.
लता मंगेशकर को इन सभी पुरस्कारों से सम्मानित किया गया–

फिल्म फेर पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)
राष्ट्रीय पुरस्कार (1972, 1975 and 1990)
महाराष्ट्र सरकार पुरस्कार (1966 and 1967)
1969 – पद्म भूषण
1974 – दुनिया मे सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज़ बुक रिकॉर्ड
1989 – दादा साहब फाल्के पुरस्कार
1993 – फिल्म फेर का लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार
1996 – स्क्रीन का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
1997 – राजीव गान्धी पुरस्कार
1999 – एन.टी.आर. पुरस्कार
1999 – पद्म विभूषण
1999 – ज़ी सिने का का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
2000 – आई. आई. ए. एफ. का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
2001 – स्टारडस्ट का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
2001 – भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न”
2001 – नूरजहाँ पुरस्कार
2001 – महाराष्ट्र भूषण

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