इंदौर में हुआ अनोखा गणेश विसर्जन…

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जी हां दोस्तों भारत में गणपति जी का त्यौहार हो और लोगो के मन में इस त्यौहार को लेकर ख़ुशी ना हो ऐसा कभी हो ही नहीं सकता. जब जब गणपति जी का त्यौहार आता है सभी लोगो के मन में उमंग हर्सोल्लास से भर जाता है भक्त इनकी प्रतिमा को जगह जगह स्थापित करते है, और आस पड़ोस के लोग इनकी प्रतिमा के दर्शन के लिए जाते है. कुछ लोग घर की सुख शांति के लिए गणेश चतुर्थी के दिन गणेशजी की प्रतिमा को अपने घर में स्थापित करते है और उनकी सुबह शाम पूजा अर्चना करते है. आपको बता दे की 10 दिन तक भक्तों को भक्ति, शक्ति और ऊर्जा का प्रसाद बांटने के गांधी बाद इंदौर के गाँधी हॉल परिसर में विराजे गणपति बाप्पा मिट्टी के उन लड्डुओं में तब्दील हो गए जो अब वर्षों तक हरियाली फैलाएंगे. इंदौर के राजा के रूप में विराजित सबसे बड़े गणेश को अपनी ही जगह पर जलाभिषेक कर विर्सजित कर दिया गया. अब इसमें बीज की दस हजार गेंद (सीड बॉल) बनाई जाएंगी. इसी गेंद से निकले अंकुरण प्रकृति की खुराक बनेंगे. आपको बता दे की इंदौर के साथ ही साथ देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब श्रीगणेश को उन्ही के स्थान पर विसर्जित किया गया. यह देश में पहली बार हो रहा है जब गणेश प्रतिमा को विसर्जित करने के बजाय सीड बॉल बनाई गई. 12 फीट ऊंची इस गणेश प्रतिमा को गणोशोत्सव के बाद यहीं स्नान कराया गया. सीड बॉल की इस जापानी पद्धति से प्रकृति को उपहार दिया जाएगा. यह गेंद मिट्टी खाद, बोरिक पाउडर, लाल मिर्च और बीज को मिलाकर बनाई जाएगी. इस नवाचार के कल्पनाकार और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर आलोक दुबे का कहना है कि यह गेंद एक साल तक सुरक्षित रहती है और इसे धरती पर जहां भी फेंक दिया जाए, बारिश होते ही इससे पौधा उगना तय है. इसमें थोड़ी और मिट्टी मिलाकर दस हजार गेंदें तैयार की जाएंगी और नर्मदा के तटों को समर्पित कर उन्हें हरी चुनर ओढ़ाई जाएगी. इसमें मुख्य रूप से गुलमोहर और इमली के बीज होंगे.

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