जानिए जयपुर के प्रसिद्ध किलों के बारे में

भारतीय इतिहास में चाहे कितनी भी घटनाये घटी हों लेकिन उन सबकी छाप आज तक प्राचीन इमारतों की दीवारों में साफ़ नजर आती है। इस सफर में आज हम बात करने जा रहे हैं भारतीय इतिहास से जुडी कुछ ऐसी ही इमारतों के बारे में जो भारत के लिए गौरवशाली साबित हुई हैं। जब कभी भी गढ़ या क़िले से जुडी कोई बात होती है तो सबसे पहले जहन में सिर्फ एक ही राज्य का नाम आता है वो है राजस्थान। जी हां दोस्तों राजस्थान के जयपुर में स्थित कुछ प्राचीन किलों के बारे में आज हम आपको बताएंगे जिनकी इतिहास में ख़ास भूमिका रही।

1.नाहरगढ़ का किला

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नाहरगढ़ का किला जयपुर को घेरे हुए अरावली पर्वतमाला के ऊपर बना हुआ है। आरावली की पर्वत श्रृंखला के छोर पर आमेर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस किले को सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने इसका निर्माण करवाया था।

माना तो यह भी जाता है कि पहले के समय में कोई एक नाहर सिंह नाम के राजपूत की प्रेतात्मा वहां भटका करती थी और किले के निर्माण में व्यावधान भी उपस्थित किया करती थी। अतः जब इस मसले को लेकर तांत्रिकों से सलाह ली गयी और उस किले को उस प्रेतात्मा के नाम पर नाहरगढ़ रखने से प्रेतबाधा दूर हो गयी थी।

सवाई राम सिंह और सवाई माधो सिंह के द्वारा भी किले के अन्दर भवनों का निर्माण कराया गया था जिनकी हालत आज भी ठीक ठाक है जब कि पुराने निर्माण अब धीरे धीरे ध्वस्त हो रहे है। यहाँ के राजा सवाई राम सिंह के नौ रानियों के लिए अलग अलग आवास खंड बनवाए गए हैं जो सबसे सुन्दर भी हैं।

इनमे शौच आदि के लिए आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था की गयी थी। किले के पश्चिम भाग में “पड़ाव” नामका एक रेस्तरां भी है जहाँ खान पान की पूरी व्यवस्र्था है। यहाँ से सूर्यास्त बहुत ही सुन्दर दिखता है।

2.आमेर का क़िला

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आमेर का किला जयपुर, राजस्थान के उपनगर आमेर में जयपुर शहर में कुछ दूरी पर स्थित है। यह जयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है, जो कि पहाड़ी पर स्थित है। आमेर दुर्ग का निर्माण राजा मान सिंह-प्रथम ने करवाया था। आमेर दुर्ग हिन्दू तत्वों की अपनी कलात्मक शैली के लिए जाना जाता है।

यह आमेर का किला, जयगढ़ दुर्ग के साथ, अरावली पर्वत श्रृंखला पर चील के टीले के ठीक ऊपर इस प्रकार स्थित है कि ये दो अलग अलग किले होते हुए भी समग्र रूप में एक विशाल संरचना का रूप लेते हुए दिखाई पड़ते हैं क्योंकि दोनों किले ना सिर्फ एक दूसरे के बेहद करीब स्थित हैं, बल्कि एक सुरंग के रास्ते से दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए भी हैं।

आमेर के किले से जयगढ़ के किले तक की यह सुरंग इस उद्देश्य से बनायी गयी थी कि युद्ध के समय में राज परिवार के लोग आसानी से आमेर के किले से जयगढ़ के किले में पहुँच सकें, जो कि आमेर के किले की तुलना में अधिक दुर्जेय है।

आमेर मुगलों और हिन्दूओं के वास्तुशिल्प का मिलाजुला और अद्वितीय नमूना है। जयपुर से पहले कछवाहा राजपूत राजवंश की राजधानी आमेर ही थी। सबसे पहले राजा मानसिंह जी ने इसका निर्माण आरंभ किया था। पहाड़ी पर बना यह महल टेढ़े मेढ़े रास्तों और दीवारों से पटा पड़ा है। महल के पीछे से जयगढ दिखाई देता है।

महल को बनाने में लाल पत्थरों और सफ़ेद मार्बल का बहुत अच्छे से उपयोग किया गया है। महल के कई अनुभाग देखने योग्य हैं। महल में जय मंदिर, शीश महल, सुख निवास और गणेश पोल देखने और घूमने के अच्छे स्थान हैं। इन्हें समय-समय पर राजा मानसिंह ने दो सदी के शासन काल के दौरान बनवाया था।

आमेर का पुराना नगर महल के पास नीचे की ओर बसा था। यहाँ का जगत शिरोमणि मंदिर, नरसिंह मंदिर देखने योग्य हैं। आमेर का किला, कला का एक सुंदर नमूना भी है। यहाँ पर बहुत सी फिल्मों की शूटिंग भी होती है।

3.जयगढ़ का क़िला

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जयगढ़ किला महाराजा जय सिंह ने 18वीं सदी में बनवाया था और यह शानदार किला जयपुर में अरावली की पहाडि़यों पर चील का टीला पर स्थित है। विद्याधर नाम के वास्तुकार ने इसका डिज़ाइन बनाया था और इस किले को जयपुर शहर की समृद्ध संस्कृति को दर्शाने के लिए बनवाया गया था।

इस किले के उंचाई पर स्थित होने के कारण इससे पूरे जयपुर शहर को देखा जा सकता है। प्राचीन समय में यह क़िला मुख्य रुप से राजाओं की आवासीय इमारत था लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल शस्त्रागार के तौर किया जाने लगा। इतिहास और वास्तुकला जयगढ़ किले के पीछे एक समृद्ध इतिहास है। मुगल काल में जयगढ़ किला राजधानी से 150 मील दूर था।

पहाड़ की चोटी पर स्थित होने के कारण इस किले से जयपुर का मनोरम नज़ारा देखा जा सकता है। बनावट के हिसाब से यह किला बिलकुल अपने पड़ोसी किले आमेर किले के जैसा दिखता है। माना जाता है कि प्राचीन समय में शासकों ने इस किले की मिट्टी में एक बड़ा खजाना छुपाया था। हालांकि एैसे खजाने को कभी बरामद नहीं किया जा सका इसलिए कहा जाता है कि जयगढ़ में आज भी यह बेशकीमती खजाना दफ़न पड़ा है।

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