सिर्फ दुर्गा पूजा के लिए ही बनाया गया है यह रेलवे स्टेशन

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उत्तर कोलकाता के उलटाडांगा इलाके में एक नया रेलवे स्टेशन तैयार खड़ा है। प्लेटफॉर्म पर कोलकाता-ढाका के बीच चलने वाली मैत्री एक्सप्रेस भी खड़ी है। यात्री दौड़-दौड़ कर ट्रेन में चढ़ रहे हैं। गाड़ी के डिब्बों में एसी चल रहा है। माइक पर बराबर कोई न कोई सूचना दी जा रही है। शहर के बीचों-बीच एक नया स्टेशन? यह स्टेशन बस कुछ दिनों के लिए बनाया गया है।

अरे बंधु, यह स्टेशन एक पूजा पंडाल है। प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन के दूसरी ओर है पूजा का स्थान, जिसे देखने के लिए इस ट्रेन से होकर प्लेटफॉर्म के दूसरी ओर उतरना पड़ेगा। इस अनोखे पंडाल से कई बातें याद दिलाई गई हैं। ट्रेन का सफर, भारत-बांग्लादेश के रिश्ते और वो हजारों आम लोग जो लोकल ट्रेनों से सफर कर कोलकाता इस दुर्गापूजा घूमने आए हैं।

कोलकाता में इस साल भी अनगिनत पंडाल बने हैं और लोगों की भीड़ हर तरफ है, जिनको बाहर से आना था, वो पहुंच चुके हैं। हर पंडाल के इर्द-गिर्द मेले लगे हैं। इन मेलों में खान-पान की चीजों के साथ ही खरीदने को भी कम दामों पर कई चीजें मौजूद हैं। हार-बुंदे, तो कहीं घर में इस्तेमाल होने वाली चीजें भी।

पूजा के मेले घूमना बड़ी प्लानिंग और मेहनत का काम है। दिन और रात एक है। ना कोई थकता है और ना ही थकने की सोचता है। दोस्ती-यारी का भी यहां परीक्षण हो जाता है। घूमेंगे तो साथ-साथ, खाएंगे तो साथ-साथ। हमारी इन बातों पर बात करते समय मैत्री एक्सप्रेस भी तैयार हो चुकी है। सीटी बज गई है। और लोगों को भी इसे अंदर-बाहर से देखना है। साथ ही सेल्फी भी लेनी है। यात्रियों की तालिका भी डब्बे पर चिपकी है। लोग कितनी लगन से साल के इस पर्व की तैयारी करते हैं।

कुछ ही दिनों में हजारों लोग भी, जो पुजा पर घर आए, ऐसे ही ट्रेन पकड़ कर दूसरे शहरों में लौट जाएंगे। हर उस घर से, जिसका बच्चा रोजगार के लिए देश के दूसरे शहरों में जा बसा है, पूछिए क्या बीतती है, जब लोग परदेसी हो जाते हैं। कुछ परवासी भी इस छोटे से स्टेशन में हमारे जीवन के कितने सच छुपे हैं। स्वप्न है। कुछ दिनों में टूट जाएगा, लेकिन फिर आएगा। लेकिन, अभी तो और कुछ दिन बाकी हैं। आइए, जब तक इस एक-जगह खड़ी रेलगाड़ी में बैठ कर सपनों का नया सफर शुरू करें।

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