ये राइटर बोले- ‘आज मैं जो कुछ हूं संजय दत्त की बदौलत हूं’

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‘जब मैं असिस्टेंट डायरेक्टर था, तब संजय दत्त ने मुझे अपना कमरा रहने के लिए दिया था। जब मैं राइटर बना, तब उन्होंने मुझे डायरेक्टर बनने का मौका दिया। जब डायरेक्टर बना, तब जैसी फिल्म बनानी चाही, वैसा काम करने में मेरी मदद की। वे इतने सपोर्टिव हैं। इंडस्ट्री में बहुत कम लोग होते हैं, जो कामयाबी-नाकामयाबी, बॉक्स-ऑफिस कलेक्शन के ऊपर सोचकर रिश्तों को अहमियत देते हैं।

उनमें नरर्गिस दत्त-सुनील दत्त जैसे महान लोगों का खून है। उनकी सामाजिक सेवा, फिल्म इंडस्ट्री में मदद करना जैसे संस्कार संजय में भी आए हैं। संजय दत्त में लाख कमियां होंगी, गलतियां करते होंगे, लेकिन उनके अंदर जो इंसान है, वह बहुत कमाल का है।’ -यह कहना है लेखक-निर्देशक संजय छेल का।

संजय दत्त से अपने रिश्तों के बारे में संजय छेल कुछ यूं बताते हैं-
संजय को ‘खूबसूरत’ में डायरेक्ट करने से पहले मैं उन्हें 1990 से जानता हूं। जब रमेश तलवार ने संजय दत्त, माधुरी दीक्षित और ऋषी कपूर स्टारर ‘साहिबान’ फिल्म बनाई थी, तो उसमें मैं असिस्टेंट डायरेक्टर था। उस समय मैं नया-नया था और संजय दत्त ने मुझे काफी सपोर्ट किया। इस फिल्म की शूटिंग जब मैसूर में हो रही थी, तब मुझे ठीक-ठाक कमरा नहीं मिला था। संजय को इस बात का पता चलते ही उन्होंने मुझे अपने कमरे पर बुला लिया था। इसके बाद मैंने ‘दौड़’ फिल्म लिखी, जिसका डायरेक्शन राम गोपाल वर्मा ने किया था। इसमें मुझे देखकर संजय दत्त बड़े खुश हुए और बोले- ‘चलो तू राइटर बन गया।’

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