सिर्फ रुपयों के लिए नहीं होता है सेक्स

लड़कियों या बच्चो का खरीदा और बेचा जाना आजकल आम बात हो गया है। फिर चाहे वो किसी भी देश की हो, किस भी धर्म की हो, किसी भी जात की हो। लेकिन थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन ने कुछ ऐसे पांच भ्रम बताए है, जिन्हें दूर करना जरूरी है.

भ्रम 1 – मानव व्यापार मतलब सेक्स के लिए खरीद बेच प्रॉस्टिट्यूशन में धकेलने के लिए इंसानों की खरीद-बेच होती है. लेकिन मानव व्यापार के और भी कई भयानक रूप हैं. मसलन, बेगार कराने के लिए बहुत बड़ी संख्या में इंसानों की खरीद-बिक्री होती है. मसाज पार्लर, मिठाई की दुकानों, किसानी, रेस्तरां और यहां तक कि घरेलू कामकाज के लिए भी ऐसा होता है.

भ्रम 2 – मानव तस्करी और मानव व्यापार एक ही हैं दोनों में एक बड़ा फर्क है. तस्करी में इंसानों को छिपा कर या अवैध कागजात के आधार पर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है और वहां उन्हें बेचा जाता है. मानव व्यापार, जिसे ट्रैफिकिंग कहते हैं, पीड़ित के घर के आसपास भी हो सकता है. उन्हें वहां भी खरीदा या बेचा जा सकता है.

भ्रम 3 – पीड़ित व्यापारियों को जिम्मेदार मानते हैं ऐसा नहीं है. बहुत से मामलों में तो मानव व्यापार के पीड़ित खुद को ही जिम्मेदार मानते हैं. वे कुछ ऐसा कहते हैं, जैसे कि मुझे ज्यादा समझ नहीं थी. मैं उसके साथ गया ही क्यों अथवा मैंने उसका भरोसा क्यों किया या मैं घर से क्यों भागा. यहां तक कि कई बार तो पीड़ित को पता ही नहीं होता कि उसकी हालत के लिए कोई और जिम्मेदार है.

भ्रम 4 – पीड़ित मदद चाहते हैं ना. हो सकता है कि पीड़ित कभी आपसे मदद न मांगें. कुछ पीड़ित तो कानून-व्यवस्था पर भरोसा ही नहीं करते. कुछ को लगता ही नहीं है कि वे पीड़ित हैं और उनका शोषण हो रहा है. शिकागो की लोयोला यूनिवर्सिटी में मानव व्यापार की एक्सपर्ट मेलिना हेली कहती हैं कि कई बार पीड़ितों को ड्रग्स का आदी बना दिया जाता है. फिर वे वही चाहते हैं.

भ्रम 5 – सेक्स ट्रैफिकिंग पैसे पर चलती है सेक्स ट्रैफिकिंग के लिए पैसे का लेन-देन हर बार नहीं होता. बहुत बार सेक्स के बदले ड्रग्स, अल्कोहल, रहने की जगह, खाने का सामान या जरूरत की और छोटी-मोटी चीजें भी दी जाती हैं. ड्रग्स के लिए सेक्स व्यापार तो ट्रैफिकिंग के सबसे बड़ी बीमारियों में से है.

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