सिंगापुर के चिड़ियाघरों में आजाद घूमते हैं जानवर, जानिए क्या कारण है ?

Lifestyle

विदेशों के खूबसूरत शहरों में से एक है सिंगापुर. ये शहर वैसे तो अपनी खूबसूरती की वजह से प्रसिद्ध है लेकिन इस शहर की एक और खासियत है यहां का चिड़ियाघर. ये चिड़ियाघर बाकी चिड़ियाघरों से बिल्कुल अलग है आप भी अगर एडवेंचर करने के शौकीन हैं तो यहां के चिड़ियाघर जरूर जाएं। इस चिड़ियाघर की खासियत यह है कि यहां लोगों के साथ जानवर भी घूमते हैं खुला.

यह भी पढ़ें-स्नैक्स की दुनिया में नया है ये बेहद चटपटा और मसालेदार रोल

यहां के चिड़ियाघर बच्चों के साथ बड़े भी मज़ा ले सकते हैं क्योंकि यहां पर पूरी तरह से जानवरों को प्राकृतिक वातावरण में रहने का अहसास दिया जाता हैं। आइएं चलते हैं सिंगापुर के विभिन्न तरह के चिड़ियाघरों में और जानते हैं इनकी खासियत।

सिंगापुर चिड़ियाघर

इसकी खास बात ये है कि यहां पर्यटक इन जंगली जानवरों को पिंजरे के अंदर नहीं बल्कि आमने-सामने देख सकते हैं। सिंगापुर चिड़ियाघर एक खास तरह का ओपन जू है, जहां जानवरों को पिंजरे के बजाए एक ऐसे घेरे में रखा जाता है जिनके चारों ओर गढ्ढे बने है। ये गढ्ढे सूखे अथवा पानी से भरे होते हैं।

जूरोंग चिड़ियाघर

विश्व का शायद ही कोई ऐसा पक्षी होगा जिसे आप इस बेहद बड़े चिड़ियाघर में न देख पाएं। यहां लगभग 7500 से ज्यादा पक्षी मौजूद हैं। इनमें से कई पक्षी ऐसे हैं जिनकी आप 8−10 प्रजातियां भी देख सकते हैं।

नाइट सफारी

नाइट सफारी भी एक चिड़ियाघर ही है जो 45 हेक्टेयर में फैला हुआ है। जानवरों के नेचर के हिसाब से इसे 8 भागों में बांटा गया है। यह चिड़ियाघर अपने नाम को सार्थक करता हुआ सिर्फ रात में ही खुला रहता है। इस चिड़ियाघर के अंदर घूमने के लिए ट्राम की सुविधा के साथ ही साथ गाइड भी उपलब्ध रहता है जो विश्व के विभिन्न भागों से लाए गए तरह−तरह के इन जानवरों के बारे में जानकारियां देता रहता है।

मिंग विलेज

जिस तरह से इंसान आधुनिकता की तरफ बढ़ रहा है, वैसे वैसे वो ग्रामीण रहन सहन और हस्तशिल्प की ओर खिंचता चला आ रहा है। इस गांव के लोग न सिर्फ अपने हाथों से चीजें बनाते हैं, बल्कि चीनी−मिट्टी के बर्तन वगैरह पर नक्काशी भी करते हैं।

अंडर वाटर वर्ल्ड

यहां का प्रसिद्ध अंडर वाटर वर्ल्ड एशिया का पहला और सबसे बड़ा समुद्र है। यहां पर आपको सैकड़ों तरह की मछलियां दिखेंगी, जिनमें सी ड्रैगन नामक एक मछली भी है। ये सारी मछलियां विश्व के अलग−अलग भागों से यहां लाई गई हैं।