गिद्ध देखने हैं तो जाएं दुधवा टाइगर रिजर्व

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दुधवा बाघ अभयारण्य केवल हिरणों, रायल बंगाल टाइगर और गेंडों के लिए ही नहीं बल्कि गिद्धों की लुप्तप्राय प्रजाति के लिए भी प्राकृतिक शरणस्थली है। दुधवा नेशनल पार्क की सोनारीपुर रेंज में सौ से अधिक गिद्ध देखे गए। रिजर्व के उप निदेशक महावीर कौजलागी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, गिद्धों का झुंड दक्षिण सोनारीपुर रेंज में एक पेड़ के ऊपर नजर आया।

उन्होंने बताया कि गिद्धों की कुछ प्रजातियां इस झुंड में हैं। गिद्ध लुप्तप्राय पक्षी प्रजाति है। दशकों पहले जिले के विभिन्न हिस्सों में सड़क किनारे गिद्ध बैठे नजर आते थे। पर्यावरण संरक्षक एवं तराई प्रकृति संरक्षण सोसाइटी के सचिव डा. विजय प्रकाश सिंह ने बताया कि डिक्लोफेनाक नामक दवाई के अंधाधुंध इस्तेमाल से गिद्धों की आबादी पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इस दवाई के पशुओं पर प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया गया और तराई क्षेत्र में इसके परिणाम सकारात्मक दिख रहे हैं।

उन्होंने बताया कि दुधवा बाघ अभयारण्य में पेड, पौधे, हरियाली और प्राकृतिक सुरम्यता एवं सौन्दर्य है। इस प्रकार यह जगह गिद्धों के लिए सुरक्षित शरणस्थली है। सिंह ने बताया कि दुधवा, कतर्नियाघाट और किशनपुर सेंचुरी के कुछ हिस्सों में गिद्धों की आबादी बढ़ी है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं।-