इस लड़के के जीवन के लिए दयावान बनकर आए थे विनोद

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गुरुवार को जिंदगी को अलविदा कह गए अभिनेता और सांसद विनोद खन्ना की जीवन की अच्छाइयां अब सामने आ रही है. ग्राम जेणी के गुलशन के लिए विनोद खन्ना फिल्म दयावान के दयावान नहीं हैं, बल्कि उसके जीवन के लिए दयावान बनकर आए थे. 13 साल पहले गुलशन के दिल में छेद था और विनोद खन्ना ने उसे अपने साथ दिल्ली ले गए और दिल का ऑपरेशन अपने खर्च पर कराया. अब गुलशन 21 साल का हो गया है और खन्ना की मौत की खबर सुनकर बहुत दुखी है.

बता दें कि 13 साल पहले 8 साल के मासूम गुलशन को 2004 में उनके पिता बोधराज और मां शशि बाला को अमृतसर के हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले गए.डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि गुलशन के दिल में छेद है और ऑपरेशन का खर्च 4 से 5 लाख रूपए (तब 2004 में) के बीच है. छोटी सी दुकान चलाने वाले बोधराज अपने लाड़ले का इलाज कराना संभव नहीं था. तब गांव के गगन सिंह ने उनको विनोद खन्ना से मिलवाया. मासूम गुलशन को इलाज के लिए खन्ना अपने साथ दिल्ली ले गए और एम्स में उसे भर्ती कराया. आज ऑपरेशन को 13 साल हो चुके हैं और गुलशन बीकॉम अंतिम वर्ष में पढ़ रहा है. गुलशन ने बताया कि एम्स में तब टेस्ट कराने के लिए उसे बाहर भेजा जाता तो खन्ना अपनी निजी गाड़ी एम्स में भेजते थे और ऑपरेशन का खर्च भी अपनी जेब से देते थे.

इसी तरह का एक और मामला सामने आया है.भनवाल के तरीड़ सिंह की पत्नी मनजीत कौर के दिल में भी छेद था. उनके लिए भी विनोद खन्ना ने अपने खर्च पर पीजीआई चंडीगढ़ में मनजीत का ऑपरेशन कराया था.जबकि उसके पति तरीड़ सिंह इलाज के लिए अपनी आधा एकड़ जमीन भी गिरवी रख चुके थे. 6 माह चले इलाज का खर्च खुद विनोद खन्ना ने उठाया. इसके बाद से हर रक्षाबंधन पर मनजीत उन्हें राखी बांधती थी. हालांकि ऑपरेशन के 10 साल बाद मनजीत की मौत हो गई, लेकिन उनके पति तरीड़ सिंह और चारों बच्चे खन्ना को दयावान का ही अवतार मानते हैं. उधर, अपने सांसद विनोद खन्ना की मौत की खबर से पूरा गुरदासपुर क्षेत्र गम में डूब गया. उनके साथ गुजारे लम्हों को याद करते हुए लोगों की आंखें नम हो गईं.उन्हें अटलजी राजनीति में लाए. उन्होंने हमेशा गुरदासपुर को अपना पांचवां बेटा माना. वे अपने इलाके में किंग ऑफ ब्रिजेज के नाम से प्रसिद्ध थे.वे चार बार गुरुदासपुर से सांसद रहे.