भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्ववर्ती पार्टी भारतीय जनसंघ (BJS) के स्थापना दिवस के 75 वर्ष पूरे होने पर आज नई दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे। भारतीय जनसंघ की स्थापना 21 अक्टूबर 1951 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी और वे इसके पहले अध्यक्ष भी रहे।
अतीत में बलराज मधोक, प्रेमनाथ डोगरा, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गज नेता इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को संभाल चुके हैं। 23 जनवरी 1977 को जनसंघ का विलय जनता पार्टी में कर दिया गया था। इसके बाद, 1980 के आम चुनाव में हार के बाद पूर्व जनसंघ के सदस्यों ने जनता पार्टी से अलग होकर 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की।
आज के इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नितिन नबीन ने कहा कि आजादी के समय लाखों लोगों ने बलिदान दिए और उन सबके पीछे एक ही लक्ष्य था, भारत को स्वतंत्र और आजाद देखना। केवल आजादी पाना ही काफी नहीं था, बल्कि एक ऐसा लोकतंत्र स्थापित करना था, जिसमें सबकी चिंता हो। अंतिम व्यक्ति तक विकास की योजनाएं पहुंचे। सांस्कृतिक विरासत की जड़ें मजबूत हों और भारत एक स्वाभिमानी देश बनकर उभरे।
आज जब मैंने जनसंघ के इतिहास पर विचार किया, तो दिल्ली प्रदेश इकाई द्वारा इस्तेमाल किया गया एक वाक्यांश मेरा ध्यान खींच गया, जनसंघ से जन-जन की यात्रा। मैं वास्तव में इसकी सराहना करता हूँ। हमारे वरिष्ठ पुरोधाओं ने जो सपना देखा था, उसे साकार करने के लिए हमें पूरी कोशिश करनी चाहिए। इस सपने को सच करने के लिए, हमें प्रधानमंत्री मोदी के उस संकल्प को अपनाना होगा, जिसमें उन्होंने देश की विकास यात्रा से हर एक व्यक्ति को जोड़ने की बात कही है। हम सभी में इस यात्रा को आगे बढ़ाने का संकल्प और प्रतिबद्धता होनी चाहिए।
जब 75 साल पहले, 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई थी, तब हमारे पास रसीदें छपवाने के लिए पैसे नहीं थे, कार्यालय के लिए कोई परिसर नहीं होता था और आवागमन के लिए कोई साधन भी नहीं था। फिर भी, एक ही विचार मन में था, अपने संगठन और अपने विचार को हर एक व्यक्ति तक पहुँचाना। आज के कार्यकर्ताओं की पीढ़ी बहुत भाग्यशाली है कि उन्हें इतने अनुकूल हालात मिले हैं।
इन अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए, यह हमारा कर्तव्य है कि हम पार्टी को और भी मजबूत बनाएँ। मेरा मानना है कि हमारे पूर्ववर्तियों का संकल्प उनके सामने आई चुनौतियों से कहीं ज्यादा बड़ा था। शायद आज की पीढ़ी को भी वैसा ही मजबूत संकल्प लेने की जरूरत है। तभी हम अपने पूर्ववर्तियों के देखे गए सपने को साकार कर पाएँगे कि भारत एक विश्व गुरु बने। यह तभी संभव है जब हम भी, अपने समय में, उसी अटूट संकल्प के साथ अपने प्रयासों को आगे बढ़ाएँ।
हमने केवल तीन सीटों से शुरुआत की थी और उन्हीं तीन सीटों से आगे बढ़कर, हमने लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाई है। लेकिन आज हमें किस चीज की जरूरत है? हमें आज भी उसी समर्पण, उसी संघर्ष और उसी संकल्प की आवश्यकता है। अगर हम भविष्य के लिए एक बेहतर भारत बनाना चाहते हैं, तो हमें संघर्ष की उसी भावना के साथ आगे बढ़ते रहना होगा।
अगर आज भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई है, तो इसका श्रेय दीनदयाल उपाध्याय के संगठनात्मक विस्तार के विजन को जाता है, जिन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए वर्षों तक काम किया। अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और जनसंघ के दौर में अध्यक्ष रहे कई वरिष्ठ नेताओं की मेहनत और प्रयासों ने भी पार्टी के विकास में योगदान दिया है।