असम में कांग्रेस को बड़ा झटका : दिग्गज नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से दिया इस्तीफा

असम में 2026 विधान सभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है, जब प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे को भेजे इस्तीफे में आंतरिक कलह, उपेक्षा और अपमान का आरोप लगाया। उनके इस फैसले से राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। इस्तीफे के बाद यह चर्चा तेज है कि बोरदोलोई भाजपा में शामिल हो सकते हैं, जिस पर हिमंता बिस्वा सरमा पहले ही उन्हें न्योता दे चुके हैं। चुनाव से ठीक पहले एक बड़े नेता के जाने से कांग्रेस की स्थिति कमजोर मानी जा रही है।

असम में कांग्रेस को बड़ा झटका : दिग्गज नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से दिया इस्तीफा

बोरदोलोई ने आरोप लगाया कि असम कांग्रेस के कुछ नेता उन्हें दरकिनार कर रहे है।

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Highlights

  • प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर पार्टी को बड़ा झटका दिया।
  • इस्तीफे की वजह आंतरिक कलह, उपेक्षा और अपमान बताई गई।
  • भाजपा में शामिल होने की चर्चा तेज, चुनाव से पहले कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ीं।

असम में 2026 के विधान सभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। पार्टी के दिग्गज नेता और नगांव से लोक सभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले से राज्य की राजनीति में खलबली मच गई है, क्योंकि बोरदोलोई पिछले करीब तीन दशकों से कांग्रेस का एक मजबूत चेहरा रहे हैं। प्रद्युत बोरदोलोई ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजा है। जानकारी के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से पार्टी के अंदर खुद को उपेक्षित और अपमानित महसूस कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि असम कांग्रेस के कुछ नेता उन्हें दरकिनार कर रहे हैं। उन्होनें आंतरिक कलह, समर्थन की कमी और संगठन के भीतर व्यक्तिगत अपमान का हवाला दिया। बोरदोलोई के इस्तीफे के साथ कांग्रेस के साथ उनका लंबे समय से चला आ रहा जुड़ाव समाप्त हो गया है।

उनके इस्तीफे के साथ ही यह चर्चा तेज हो गई है कि वह जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम सकते हैं। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा ने पहले ही सार्वजनिक रूप से उन्हें भाजपा में आने का न्योता दिया था। मुख्यमंत्री सरमा का कहना है कि कांग्रेस में "सनातनी हिंदुओं" के लिए अब जगह नहीं बची है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा उन्हें आगामी विधान सभा चुनाव में दिसपुर जैसी किसी सीट से मैदान में उतार सकती है। समय बढ़ने के साथ-साथ असम में कांग्रेस वैसे ही कमजोर होती जा रही थी, अब एक और दिग्गज नेता के चले जाने से स्थिति और ज्यादा बिगड़ सकती है।

असम में चुनाव की तारीखें बेहद करीब हैं और ऐसे समय में एक सीनियर सांसद का साथ छोड़ना कांग्रेस के लिए किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है। इससे पहले भी प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा पार्टी छोड़कर भाजपा में जा चुके हैं। एक के बाद एक बड़े नेताओं का जाना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर असंतोष चरम पर है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस नुकसान की भरपाई कैसे करती है और क्या बोरदोलोई के जाने से भाजपा को चुनाव में एकतरफा बढ़त मिल जाएगी। जानकारी के लिए बता दें कि बोरदोलोई इससे पहले 1998 से 2016 तक मार्घेरिटा सीट से विधायक रह चुके हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई की सरकार में 2006 से 2015 तक कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं, जहां उन्होंने उद्योग एवं वाणिज्य और शिक्षा मंत्रालय जैसे अहम मंत्रालयों का कार्यभार संभाला था। एक समय पर उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर गोगोई के उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जाता था।

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