भारत में आज, 21 अक्टूबर को, राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस (National Police Commemoration Day) मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर वीर पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, "पुलिस स्मृति दिवस हमारे पुलिस कर्मियों के प्रति गहरा आभार व्यक्त करने का अवसर है, जो अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं देते हैं।"
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "कानून-व्यवस्था बनाए रखने से लेकर अपराधों से लड़ने, आपातकालीन स्थितियों में मदद करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तक, उनका योगदान अमूल्य है। हम उन बहादुर पुलिस कर्मियों को सादर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका साहस, अटूट समर्पण और सर्वोच्च बलिदान हमारे देश की स्मृतियों में सदैव अंकित रहेगा।"
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस परेड में शामिल हुए और उन्होंने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें X पर शेयर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को अपनी आंतरिक सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों पर गर्व है। उन्होंने आगे रेखांकित किया कि वैश्विक उथल-पुथल के दौर में भी अगर देश का लोकतंत्र सुरक्षित है, तो इसमें हमारे पुलिस बल की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्त कराने में जवानों के अविस्मरणीय योगदान की सराहना की। इसके साथ ही, उन्होंने शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनशीलता व्यक्त करते हुए जानकारी दी कि सरकार ने शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को मिलने वाली 1 करोड़ रूपए की सहायता राशि का 50% पत्नी को और 50% माता-पिता को देने का निर्णय लिया है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक से एक राष्ट्रव्यापी मोटरसाइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। फाइट अगेंस्ट ड्रग्स की थीम पर आयोजित इस बाइक रैली में लगभग 90 राइडर्स शामिल हैं, जो नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इनके साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और केंद्रीय पुलिस संगठनों (CPOs) के जवान भी शामिल हैं। ये राइडर्स कई राज्यों से होकर गुजरेंगे और अपनी यात्रा गुजरात के एकता नगर में समाप्त करेंगे। वहां वे 31 अक्टूबर को होने वाली भव्य एकता परेड में हिस्सा लेंगे। अमित शाह ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया और उन जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। उन्होंने एक कार्यक्रम को संबोधित भी किया।
सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर, नेशनल पुलिस मेमोरियल में आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है। आज हम यहाँ उन बहादुर पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित हुए हैं, जिन्होंने आजादी के समय से लेकर आज तक देश की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। आजादी के लगभग आठ दशक बाद, आज हमारा देश दुनिया में सम्मानजनक स्थिति में खड़ा दिखाई देता है। हमारे बहादुर जवानों के बलिदानों ने ही इसकी नींव रखी है।
कोई सोच भी नहीं सकता कि अगर इन जवानों ने आंतरिक सुरक्षा और देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान न दिया होता, तो आज हम कहाँ खड़े होते। भारतीय पुलिस के लिए 2026 का साल बहुत महत्वपूर्ण है। 31 मार्च 2026 को हमने देश को उस नक्सलवाद से मुक्त किया, जिसने दशकों तक देश को जकड़ रखा था। 1981 से लेकर मार्च 2026 तक, देश ने नक्सलवाद के कारण बहुत कुछ सहा है। इस दौरान 3,600 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और लगभग 13,700 निर्दोष नागरिक भी मारे गए।
इस दौरान अमित शाह ने पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास भी साझा किया। उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के सुदूर हॉट स्प्रिंग्स इलाके में, चीनी सेना के हमले का बहादुरी से सामना करते हुए CRPF के 10 जवानों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। जब हम हॉट स्प्रिंग्स की घटना के बारे में जानते हैं, तो हमें एहसास होता है कि ऊंचे पहाड़ों पर जब लड़ने का फैसला लिया गया था, तब शायद इसका नतीजा पहले से ही तय लग रहा था।
लेकिन, देश के इन अमर सपूतों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। वे अपनी आखिरी सांस तक इस संकल्प पर अडिग रहे कि देश की जमीन का एक इंच भी हिस्सा विदेशी हाथों में नहीं जाना चाहिए। तब से, हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। 2018 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उद्घाटन किया, जहाँ हम आज खड़े हैं, जो देश भर के उन पुलिसकर्मियों को समर्पित है, जो शहीद हुए हैं।
जहाँ देश उत्तर प्रदेश और बिहार में चुनावी हिंसा को खत्म करने में सफल रहा है, वहीं बंगाल में लंबे समय से चुनावी हिंसा जारी है। हर चुनाव में 25, 50, 100 या यहाँ तक कि 200 लोगों की जान गई है। मैं पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को बिना किसी की जान गए सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए CAPF के सभी जवानों की दिल से सराहना करता हूँ। हमारे सुरक्षाकर्मियों ने एक नया मानक स्थापित किया है। आज, हर कोई मानता है कि देश चुनावी हिंसा से मुक्त हो गया है।
इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों से कहा कि सभी सरकारी सेवाओं में से यदि कोई सेवा सबसे कठिन है, तो वह पुलिस सेवा है। देश का हर नागरिक रक्षा बंधन, होली, दिवाली और ईद जैसे त्योहार मनाता है, लेकिन पुलिसकर्मियों के लिए कोई त्योहार नहीं होता। जिन दिनों हम अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाते हैं, उन दिनों हमारे पुलिसकर्मी आंतरिक सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और लोगों की सुरक्षा की चिंता करते हुए अपनी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। अपने जीवन के सबसे अच्छे साल अपने परिवार से दूर रहकर राष्ट्र को समर्पित कर देना, एक बहुत बड़ी सेवा है।