अमेरिका से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इलिनोइस (Illinois) के ऑरोरा (Aurora) इलाके में एक बड़ा हादसा टल गया। 19 साल का एक अमेरिकी युवक बड़े पैमाने पर गोलीबारी (Mass Shooting) करने के इरादे से एक हिंदू मंदिर पहुंचा था। लेकिन, ऐन मौके पर उसकी बंदूक जाम हो गई, जिससे एक बड़ी त्रासदी टल गई। इस युवक की पहचान पैलेटाइन (Paletine) के रहने वाले एलेक्जेंड्रोस पैपोराकिस (Alexandros Paporakis) के रूप में हुई है, जो टैको बेल में काम करता था। एलेक्जेंड्रोस ने ऑरोरा में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाने की योजना बनाई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारियों को उसके घर से बिना सीरियल नंबर वाली AR-स्टाइल राइफल, एक लोडेड मैगजीन, सैकड़ों राउंड गोलियां और टैक्टिकल उपकरण मिले हैं। जाँच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपी श्वेत वर्चस्ववादी (White Supremacist) विचारधारा का समर्थन करता था। पुलिस और अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसके पास से आठ पन्नों का एक घोषणापत्र भी मिला, जिसमें भारतीयों, यहूदियों और अश्वेत लोगों के खिलाफ नफरत और हिंसा से जुड़ी बातें लिखी थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दस्तावेज में भारतीयों और हिंदुओं को निशाना बनाने से संबंधित विचार भी शामिल थे।
इस घटना को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी प्रतिक्रिया दी है। MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इलिनोइस के ऑरोरा इलाके में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर गोलीबारी करने की कथित साजिश की खबरों से हम बेहद चिंतित हैं। इस कथित साजिश का हिंदू-विरोधी और नस्लवादी स्वरूप, जिसमें भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा का जिक्र भी शामिल है, विशेष रूप से चिंताजनक है।
हमने अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई पर ध्यान दिया है, जिसमें संदिग्ध की गिरफ्तारी और हिरासत, तथा उस पर लगाए गए आरोप शामिल हैं। यह घटना अमेरिका में नस्लवादी शत्रुता और भारत-विरोधी नफरत को लेकर बढ़ती चिंताओं को और बढ़ाती है। भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिक सतर्कता बरतने, नफरत से प्रेरित हिंसा के प्रति जीरो टॉलरेंस अपनाने और निर्णायक कार्रवाई करने की आवश्यकता है। हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिकी अधिकारी इस मामले की गहन जांच करेंगे, दोषियों को न्याय के कटघरे में लाएंगे और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।