भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शन्स रशिया एंड ईरान एक्ट' पर हस्ताक्षर करने के ठीक एक महीने बाद, रूस से ईंधन की बिक्री से जुड़े कई प्रतिबंधों में छूट दे दी है। ट्रम्प ने इसके लिए 'ग्राहम एक्ट' की धारा 115 का इस्तेमाल किया है, जो राष्ट्रपति को किसी भी विदेशी व्यक्ति या देश पर लागू पाबंदियों और टैरिफ को हटाने या उनमें छूट देने का विशेष अधिकार देती है।
फिलहाल रोके गए इस कानून के तहत, रूस से कच्चा तेल या गैस आयात करने वाले पांच सबसे बड़े देशों, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं, से अमेरिका आने वाले सामानों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इस पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं हैं। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जब भी देश के प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के अलग-अलग देशों की यात्रा पर जाते हैं, तो वे शांति का संदेश लेकर जाते हैं। इसी शांति संदेश का नतीजा है कि अब टैरिफ हटा दिए गए हैं, जिसका फायदा पूरे भारत को मिलेगा। प्रधानमंत्री इसी तरह के काम करते हैं, जिसे विपक्ष समझ ही नहीं पाता।
वहीं समाजवादी पार्टी (SP) के नेता फखरुल हसन चांद का कहना है कि, SP का मानना है कि जिस तरह से अमेरिका लगातार अपने टैरिफ में बदलाव कर रहा है और साथ ही अमेरिकी प्रतिबंध और निर्देश थोप रहा है, उसे देखते हुए भारत को कुछ खास कूटनीतिक तैयारियां करने की जरूरत है। चूंकि अमेरिका अपने टैरिफ में लगातार फेरबदल करता रहता है, इसलिए उसे ये चीजें तय करने का अधिकार कहां से मिल जाता है? भारत को अन्य देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करके दूसरे विकल्प तलाशने चाहिए। इससे अमेरिका पर देश की निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे हमारे देश पर अमेरिकी नीतिगत फैसलों का असर भी कम होगा।
पूर्व राजनयिक केपी फेबियन ने कहा कि, "हमें यह समझने की जरूरत है कि लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट के विपरीत, राष्ट्रपति ट्रंप ने शी जिनपिंग के सामने इसका जिक्र करने की हिम्मत नहीं की, क्योंकि चीन उनका सबसे बड़ा खरीदार है। इसके बाद भारत का नंबर आता है। ऐसा क्यों? क्योंकि वह शी जिनपिंग के साथ G2 चाहते थे। दूसरी बात, ट्रंप ने खुद राष्ट्रपति पुतिन से बात की है और रूस से डीजल खरीद रहे हैं। इसलिए, अगर अमेरिका खुद ही (रूस से) खरीदारी कर रहा है, तो उसे खुद पर ही प्रतिबंध लगाना चाहिए। वह भारत पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता।"