सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 20 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, मचा हड़कंप

फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं।

सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 20 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, मचा हड़कंप

मिड-डे मील खाने के कुछ देर बाद ही बच्चों को उलटी-दस्त और घबराहट होने लगी।

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Highlights

  • मिड-डे मील खाने के बाद सरकारी स्कूल के 20 बच्चों की बिगड़ी तबीयत।
  • सभी 58 छात्रों को अस्पताल ले जाया गया, 20 में मिले फूड पॉइजनिंग के लक्षण।
  • खाने के सैंपल जांच के लिए भेजे गए, दोषियों पर कार्रवाई की बात कही गई।

कर्नाटक के बीदर जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 20 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। यह घटना मंगलवार, 3 फरवरी की है, जिसके बाद हड़कंप मच गया। मामला बीदर जिले के जमालापुरा सरकारी प्राथमिक स्कूल का है। मंगलवार दोपहर बच्चों को खाना परोसा गया, जिसे खाने के कुछ देर बाद कई बच्चों ने पेट दर्द की शिकायत शुरू कर दी। देखते ही देखते बच्चों को उल्टी, दस्त और घबराहट होने लगी। बच्चों की हालत देखकर शिक्षक चिंतित हो गए और एहतियात के तौर पर सभी 58 छात्रों को औराद तालुक अस्पताल पहुंचाया गया। जांच के बाद बताया गया कि इनमें से 20 बच्चों में फूड पॉइजनिंग के लक्षण पाए गए, इसलिए उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।

फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं। 5-6 बच्चों को अभी भी डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और पूरी तरह ठीक होने के बाद ही उन्हें छुट्टी दी जाएगी। इस घटना के बाद प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। बच्चों को जो सांभर, चावल आदि परोसे गए थे, उनके सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। सरकार ने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि आखिर गड़बड़ी कहां हुई। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। औराद विधानसभा क्षेत्र से विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रभु चौहान भी अस्पताल पहुंचे और बीमार बच्चों का हालचाल जाना।

मिड-डे मील का उद्देश्य बच्चों को जरूरी पोषण देना होता है, लेकिन इस तरह की घटनाएं बच्चों के माता-पिता के मन में डर पैदा कर देती हैं। हालांकि यह कोई पहला मामला नहीं है। देश में इस तरह की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ऐसे हादसों को रोकने के लिए एक मजबूत समाधान की आवश्यकता है। किसी भी कीमत पर देश में बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ या लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

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