शरद पवार ने अजित पवार के साथ पुनर्मिलन से किया इनकार, बीजेपी समर्थित गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे

शरद पवार ने अजित पवार के साथ एनसीपी के एकीकरण की अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी समर्थित गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे और वैचारिक रूप से समान दलों के साथ रहेंगे।

शरद पवार ने अजित पवार के साथ पुनर्मिलन से किया इनकार, बीजेपी समर्थित गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे

अजित पवार के साथ आने की अफवाह को शरद ने किया खारिज

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Highlights

  • शरद पवार ने अजित पवार के साथ पुनर्मिलन से इनकार किया।
  • बीजेपी समर्थित गठबंधन में शामिल होने से साफ मना।
  • एनसीपी (एसपी) विपक्षी महाविकास अघाड़ी के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने अपने भतीजे तथा उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ किसी भी तरह के पुनर्मिलन की संभावनाओं को पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह कभी भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) समर्थित गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में एक पारिवारिक समारोह में दोनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी से एनसीपी के एकीकरण की अटकलें तेज हो गई थीं।

शरद पवार ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में इन अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, "हम कभी उन लोगों के साथ हाथ नहीं मिला सकते जो अवसरवादी हैं और बीजेपी के साथ खड़े हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी का वैचारिक स्टैंड स्पष्ट है और वह विपक्षी गठबंधन के साथ बने रहेंगे। यह बयान एनसीपी (एसपी) के कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह पैदा कर रहा है, जो लंबे समय से पार्टी के विभाजन से जूझ रहे हैं।

पृष्ठभूमि में देखें तो एनसीपी का विभाजन जुलाई 2023 में हुआ था, जब अजित पवार ने शरद पवार से अलग होकर अपनी अलग पार्टी बनाई और बीजेपी-शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के साथ महायुति गठबंधन में शामिल हो गए। अजित पवार वर्तमान में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री हैं और उनकी पार्टी को चुनाव आयोग ने एनसीपी का आधिकारिक नाम और चुनाव चिन्ह प्रदान किया है। वहीं, शरद पवार की पार्टी को एनसीपी (एसपी) के नाम से जाना जाता है। इस विभाजन के बाद से ही समय-समय पर दोनों गुटों के एक होने की अफवाहें उड़ती रही हैं, खासकर लोकसभा चुनावों के बाद जब एनसीपी (एसपी) ने अच्छा प्रदर्शन किया।

हालिया अटकलों की शुरुआत शरद पवार के पोते युगेंद्र पवार की सगाई समारोह से हुई, जहां चाचा-भतीजे एक साथ नजर आए। इस कार्यक्रम में दोनों नेताओं की हंसी-मजाक और पारिवारिक एकता की तस्वीरों ने एनसीपी समर्थकों में उम्मीद जगाई कि शायद राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर पार्टी फिर से एक हो जाए। कुछ दिनों पहले एनसीपी की स्थापना दिवस पर भी दोनों गुटों के नेताओं की अलग-अलग बैठकें हुईं, लेकिन साझा मंच की अफवाहें फैलीं। हालांकि, अजित पवार ने भी इन अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों गुट अब अलग-अलग रास्तों पर हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है। लोकसभा चुनावों में एनसीपी (एसपी) ने 10 में से 8 सीटें जीतीं, जबकि अजित पवार की पार्टी को सिर्फ 1 सीट मिली। विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही महायुति गठबंधन में तनाव बढ़ रहा है, और शरद पवार का स्टैंड विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को मजबूती प्रदान कर सकता है। एमवीए में कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और एनसीपी (एसपी) शामिल हैं।

शरद पवार ने आगे कहा कि उनकी पार्टी केवल वैचारिक रूप से समान विचारधारा वाले दलों के साथ ही गठबंधन करेगी। उन्होंने अवसरवादियों पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे लोग जो सत्ता के लिए सिद्धांतों से समझौता करते हैं, उनके साथ कोई समझौता नहीं होगा। इस बयान से एनसीपी (एसपी) के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है, और पार्टी अब आगामी स्थानीय निकाय चुनावों पर फोकस कर रही है।

महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार का प्रभाव अहम रहा है। शरद पवार चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और केंद्रीय मंत्री भी। अजित पवार भी कई बार उपमुख्यमंत्री बने हैं। लेकिन अब यह स्पष्ट है कि परिवारिक रिश्ते राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर भारी नहीं पड़ेंगे। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि दोनों गुट अलग रहते हैं, तो विपक्ष मजबूत हो सकता है, जबकि महायुति को नुकसान पहुंच सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये अटकलें पूरी तरह थम जाती हैं या नया मोड़ लेती हैं।

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