ज्ञानेश कुमार के विरोध पर भाजपा का पलटवार, सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को घेरा

डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि लगातार हार से विक्षिप्त प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी के प्रथम परिवार ने, जिसने पिछली चार पीढ़ियों से लोकतंत्र के आवरण में राजतंत्र की तरह शासन चलाया है और हमेशा लोकतंत्र का गला घोंटा है, आज आकाशवाणी में घुसपैठ करने का प्रयास किया है।

ज्ञानेश कुमार के विरोध पर भाजपा का पलटवार, सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को घेरा

चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के हंगामे पर भाजपा का कांग्रेस पर पलटवार, सुधांशु त्रिवेदी ने साधा निशाना।

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Highlights

  • सुधांशु त्रिवेदी ने वोटर लिस्ट में डुप्लिकेट और मृत वोटरों को लेकर कांग्रेस से सवाल किया।
  • सुधांशु त्रिवेदी ने सेना समेत कई भारतीय संस्थानों पर कांग्रेस के आरोपों का मुद्दा उठाया।
  • सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी से विधानसभा चुनावों में प्रचार को लेकर सवाल पूछा।

एक तरफ जहां राजधानी दिल्ली में कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी पार्टियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। वहीं, अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी कांग्रेस पर पलटवार किया है। आज BJP ने पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। त्रिवेदी ने कहा कि लगातार हार से विक्षिप्त प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी के प्रथम परिवार ने, जिसने पिछली चार पीढ़ियों से लोकतंत्र के आवरण में राजतंत्र की तरह शासन चलाया है और हमेशा लोकतंत्र का गला घोंटा है, आज आकाशवाणी में घुसपैठ करने का प्रयास किया है।

उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी और उनके कई वरिष्ठ नेताओं ने खुद कहा है कि कई जगहों पर वोटर लिस्ट में एक ही नाम कई बार दर्ज हैं। अभिषेक मनु सिंघवी, अशोक गहलोत, सचिन पायलट और कई दूसरे बड़े नेता भी यही बात कहते रहे हैं। के.सी. वेणुगोपाल ने भी यही कहा है। इसलिए, हम उनसे पूछना चाहते हैं कि क्या आप 2016, 2018, 2020 और 2021 में सही थे या आज सही हैं?

कांग्रेस को यह साफ करना चाहिए कि वह तब सच बोल रही थी या आज सच बोल रही है। त्रिवेदी ने कांग्रेस पार्टी से कुछ सवाल भी पूछे। उन्होंने बताया कि जिन 13 करोड़ वोटरों का जिक्र किया गया है, उनमें से 2.8 करोड़ की मौत हो चुकी है, 6.3 करोड़ लोग दूसरी जगह चले गए हैं, 1 करोड़ डुप्लिकेट हैं (दो जगहों पर रजिस्टर्ड हैं) और 3 करोड़ लोग मौजूद नहीं हैं या उनका पता नहीं चल पा रहा है। उन्होंने पूछा कि जो लोग भारत की अर्थव्यवस्था को "मृत" बताते हैं, वे इन मृत और डुप्लिकेट लोगों को वोटिंग के अधिकार से कैसे जोड़ रहे हैं।

त्रिवेदी ने एक और सवाल उठाया। जैसे कौन बनेगा करोड़पति जैसा शो होता है, वैसे ही आज देश के सामने यह सवाल रखा जाना चाहिए। कांग्रेस ने अब तक कितने भारतीय संस्थानों पर आरोप लगाए हैं? कांग्रेस ने अब तक देश की कितनी संस्थाओं पर आरोप लगाए हैं? एक दर्जन, आधा दर्जन, डेढ़ दर्जन, दो दर्जन?

भारतीय सेना से लेकर भारतीय वायु सेना तक, भारत के रक्षा तंत्र से लेकर LIC तक, HAL से लेकर SBI, SEBI और वैक्सीन तक, ऐसी कौन सी चीज है जिस पर उन्होंने आरोप नहीं लगाए हैं? भारतीय न्यायपालिका, भारतीय मीडिया? तो, मैं आज देश के सामने कांग्रेस पार्टी से यह पूछना चाहता हूं कि इस बात पर एक क्विज प्रतियोगिता होनी चाहिए कि कांग्रेस ने और खासकर राहुल गांधी ने अब तक कितनी भारतीय संस्थाओं पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ये सब बातें विदेश जाकर भी कही हैं।

क्या भारत में ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी सिस्टम की जांच-पड़ताल की जा रही है? अलग-अलग क्षेत्रों में पहले भी कई बार ऐसा हुआ है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि असली लाभार्थियों, यानी जो सच में हकदार हैं, को उनका हक मिल रहा है या नहीं। मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि हमारी सरकार के सत्ता में आने के बाद, जब राशन कार्डों की जांच की गई, तो 5.8 करोड़ राशन कार्ड ऐसे लोगों के नाम पर पाए गए जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं था।

कांग्रेस को हमें यह बताना चाहिए। आखिरी SIR 2003 में हुआ था। उससे पहले, आप कितने राज्यों में सत्ता में थे? मैंने यह बात पहले भी कही है और मैं इसे दोहरा रहा हूं। उससे भी पहले, कांग्रेस 228 लोकसभा सीटों वाले राज्यों में हमेशा के लिए सत्ता से बाहर हो चुकी थी। यह सब राहुल गांधी के राजनीति में आने से कांग्रेस को हुए भारी नुकसान से पहले की बात है।

डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा, "हम राहुल गांधी से पूछना चाहते हैं। आपने कितने विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी के लिए वहां रहकर प्रचार किया है? क्या आप कभी 15 दिन रुके हैं? 10 दिन? या एक हफ्ता भी? जैसा कि गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे पश्चिम बंगाल में 25 दिन रहेंगे, मैं राहुल गांधी जी से पूछना चाहता हूं कि 2004 के बाद से किसी ऐसे विधानसभा चुनाव का नाम बताएं जिसमें वे लगातार डेढ़ या दो हफ्ते तक किसी एक राज्य में रुके हों।"

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