
नई दिल्ली: चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अपनी सैन्य शक्ति को एवं मजबूत करने के लिए एक अनोखा कदम उठा लिया है। अब उसने अपने कुनबे में रोबोटिक भेड़िए को भी अपने ग्रुप में शामिल कर लिया है, जो युद्ध के मैदान में सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर सकता है। मंगलवार, 5 अगस्त 2025 को चीनी सेना ने इस रोबोटिक भेड़िए के साथ एक विशेष सैन्य अभ्यास किया, जिसमें इसकी गोलीबारी और मुश्किल इलाकों में ऑपरेशन करने की क्षमता का प्रदर्शन भी किया है।
खबरों का कहना है कि सरकारी चैनल CCTV द्वारा जारी वीडियो में इस रोबोटिक भेड़िए की क्षमताओं को साफ तौर पर भी देख सकते है। वीडियो में यह रोबोट पहले सीढ़ियाँ चढ़ता हुआ दिखाई देता है, इसमें वह आम सैनिकों की तरह आसानी से चढ़ाई को पूरा कर सकता है। इसके पश्चात इसे पहाड़ी क्षेत्रों में ले जाया गया, जहाँ इसने बिना किसी परेशानी के ऑपरेशन को अंजाम दे डाला।
इतना ही नहीं सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन बर्फीले क्षेत्रों में देखने के लिए मिला, जहाँ यह रोबोटिक भेड़िया सैनिकों के साथ कदम से कदम मिलाता हुआ दिखाई दिया। इस अभ्यास में भेड़िए ने हर सेकंड एक गोली दागने की क्षमता दिखाई, जो इसे युद्ध के मैदान में एक घातक हथियार बनाता है। खबरों का कहना है कि यह अभ्यास पूरी तरह सफल रहा, और जल्द ही PLA इस रोबोटिक भेड़िए के बारे में और अपडेट जारी करेगी।
2024 में हुई थी घोषणा :
खबरों का कहना है कि चीन ने पहली बार 2024 में इस रोबोटिक भेड़िए को अपनी सेना में शामिल करने का एलान किया था। उस समय एक फोटो भी जारी कर दी गई है, इसमें भेड़िए के साथ QBZ-191 असॉल्ट राइफल लगाई गई थी। यह राइफल इसे स्वचालित रूप से गोलीबारी करने में सक्षम बना रही है। इस रोबोट का वजन लगभग 70 KM है और इसे विशेष रूप से सुदूर और दुर्गम इलाकों में युद्ध के लिए डिज़ाइन किया गया है।
चाइना साउथ इंडस्ट्रीज ग्रुप कॉर्पोरेशन द्वारा निर्मित यह रोबोटिक भेड़िया न केवल स्वतंत्र रूप से ऑपरेशन कर सकता है, बल्कि सैनिकों के साथ मिलकर भी मिशन को अंजाम दे सकता है। इसका निर्माण PLA की थल सेना को अत्याधुनिक बनाने के व्यापक कोशिश का भाग है।
किन इलाकों के लिए है खास? :
यह रोबोटिक भेड़िया विशेष रूप से पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में युद्ध के लिए बनाया गया है। इसका डिज़ाइन इसे ऊबड़-खाबड़ इलाकों, सीढ़ियों और बर्फीली चोटियों पर आसानी से काम करने में सक्षम बनाता है। यह उन क्षेत्रों में उपयोगी है, जहाँ मानव सैनिकों के लिए ऑपरेशन करना जोखिम भरा हो सकता है। इसकी यह खासियत इसे सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनाती के लिए आदर्श बनाती है।
चीन की विस्तारवादी नीति और क्षेत्रीय तनाव :
चीन की विस्तारवादी नीतियों की वजह से उसका कई देशों के साथ तनाव बढ़ रहा है। भारत, जापान, फिलिपींस और ताइवान जैसे देशों के साथ उसकी सीमा विवाद को लेकर तनातनी है। इसके अलावा, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ उसका वैश्विक प्रभुत्व को लेकर टकराव है। हाल ही में ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि अगर चीन ताइवान के खिलाफ कोई आक्रामक कार्रवाई करता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। अमेरिका भी ताइवान के समर्थन में खड़ा है। दूसरी ओर, भारत के साथ लेह-लद्दाख और पूर्वोत्तर की सीमा पर चीन का तनाव बना हुआ है। ऐसे में रोबोटिक भेड़िए जैसे हथियारों का विकास चीन की सैन्य रणनीति को और आक्रामक बनाने का संकेत देता है।
वैश्विक प्रभाव और भारत के लिए चुनौतियाँ :
चीन का यह कदम वैश्विक सैन्य तकनीक में एक नया आयाम जोड़ता है। रोबोटिक हथियारों का उपयोग युद्ध के मैदान में मानव सैनिकों पर निर्भरता को कम कर सकता है और जटिल इलाकों में सैन्य अभियानों को और प्रभावी बना सकता है। भारत के लिए यह एक चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में चीन के साथ सीमा तनाव पहले से ही मौजूद है। भारत ने भी हाल के वर्षों में अपनी सैन्य तकनीक को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें ड्रोन और स्वदेशी हथियारों का विकास शामिल है। हालांकि, चीन के इस नए रोबोटिक भेड़िए ने क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता को और जटिल कर दिया है।