कांग्रेस ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आज दिल्ली में विपक्षी नेताओं के लिए फिर से लंच मीटिंग बुलाई। इसमें राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के कई नेता दिखाई दिए। मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि कांग्रेस का संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक हम लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर लेते और जब तक हम भारत के संविधान को बचा नहीं लेते।
वहीं, जेबी माथेर ने कहा कि लंच हो या न हो, हम खाएं या न खाएं, विरोध जारी रहेगा। न सिर्फ परसों, न सिर्फ कल, बल्कि आज भी। हम यह साफ कर रहे हैं कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक हमारा विरोध जारी रहेगा। इस बीच, कांग्रेस ने अपने सांसदों और मुख्यमंत्रियों को दिल्ली तलब किया है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी दिल्ली पहुंचेंगी। दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हम परसों चुनाव आयोग जाना चाहते थे। हम चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे। हम चुने हुए जन-प्रतिनिधि हैं। लेकिन हमें मिलने नहीं दिया गया।
कल हम जंतर-मंतर जाना चाहते थे। हम जंतर-मंतर पर धरना देना चाहते थे, क्योंकि हमें मिलने नहीं दिया गया था। लेकिन कल हमें जंतर-मंतर पर बैठने भी नहीं दिया गया। आपने देखा कि पुलिस ने कितनी बर्बरता की। देश में सत्ता में बैठी तानाशाही ताकत देश के लोगों की आवाज दबाना चाहती है। देश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग की मिलीभगत से चुनाव हो रहे हैं, हम ऐसा नहीं होने देंगे।
वहीं लोकसभा सांसद ज्योतिमणि ने कहा कि हम लोकतंत्र, संविधान और लोगों के वोट देने के अधिकार की रक्षा के लिए विरोध कर रहे हैं, जो लोकतंत्र में एक बहुत ही बुनियादी अधिकार है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार एक गैर-कानूनी सरकार है, जिसे ज्ञानेश कुमार ने चुना है, न कि लोगों ने। सरकार के पास बने रहने की कोई वैधता नहीं है। जो कोई भी लोकतंत्र की अवधारणा को समझता है, उसे अब तक इस्तीफा दे देना चाहिए था।
केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि BJP, अमित शाह, प्रधानमंत्री मोदी और ज्ञानेश कुमार भारतीय लोकतंत्र में अराजकता फैला रहे हैं। वे भारतीय लोकतंत्र को खत्म करने वाले हैं। हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए यहां हैं और वही कर रहे हैं। यह हमारे लिए वोटरों यानी देश के आम लोगों की रक्षा करने की करो या मरो वाली लड़ाई है।